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Monday, February 9, 2026

शेखपुर के ऐतिहासिक मेले का हुआ आगाज, उमड़ी मुरीदन की भीड़

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फर्रुखाबाद: कमालगंज के शेखपुरा (Sheikhpur) में ऐतिहासिक मेले (historic fair) का आगाज हुआ। बड़ी तादाद में भारी तादाद मुरी दिन कई जगह से आए। मौके पर दरगाह में उर्स का आयोजन किया गया जिसमें महफिले मिला शरीफ व कुल हुआ। वतर्मान में 701 वर्ष पूर्व जब भोजपुर एक अच्छा शहर हुआ करता था और उस समय फर्रुखाबाद आबाद नहीं था।

गंगा नदी के किनारे मुल्क शीशतान के बादशाह हजरत शेख मखदूम महमूद बुर्राक शाह लंगर जहां सोहरवी जिन्होंने बादशाहत को ठोकर मार दी और रुहानी दुनियां में कदम रख दिया। चौथाई संसार का भ्रमण करने के बाद अपने पीरोमुर्शिद हजरत सैय्यदना रुकने आलम अबुल फतेह मुल्तानी सोरवदी के हुक्म से मुल्क हिन्दुस्तान में भोजपुर तशरीफ लाये और भोजपुर में 17 जमादिउल आखिर 746 हिजरी। में आपने आखिरी सांस ली और 701 वर्ष पूर्व भोजपुर में हजरत शेख मखदूम ने दुनिया को छोड़ दिया। जहां आपकी चिल्लागाह आपको शेखपुर में सुपुर्द-ए-खाक किया गया। जहां आपकी आलीशान दरगाह-ए-मखदूमियां शेखपुर है। जो सदियों से कौमी एकता का संदेश देती चली आ रही है।

हजरत शेख मखदूम का 701वां उर्स मुबारक शानदार तरीके से शुरू हुआ।जिसको छड़ियों वाले मेले के नाम से भी जाना जाता है। उर्स के इस मौके पर भोजपुर में वाद नमाज जोहर महफिले मीलाद-ए- पाक का आयोजन किया गया। मीलाद-ए-पाक में नातिया कलाम पेश किये गये और सलातोसलाम के नजराने पेश किये गये। नमाजे असर से पहले चिल्लागाह पर जहां आज के ही दिन हजरत शेख मखदूम का विसाल (देहावसान) हुआ था। महफिले सिमा का आगाज हुआ और कुलशरीफ हुआ। दरगाह मखदूमिया के सज्जादानशीन हजरत अजीजुलहक गालिब मियां ने होश में आने के बाद मुल्क में अमन, चैन और खुशहाली के लिए दुआये खैर की। कल शेखपुर और भोजपुर में परम्परागत मेला शेखपुर होगा।

परम्परा के अनु‌सारवही पुरानी ढप बजा कर लतीफ शेखपुरी ने को फारसी भाषा में लिखी रुबाई (श्लोक पढ़ी जिसके रूहानी (अध्यात्मिक) भेद को समझते ही सज्जादानशीन अजीजुल हक गालिब मियाँ पर बन्द (अचेतन) तारी हो गया। उसके बाद महफ़िल मीलाद का आयोजन किया गया।

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