राज्यव्यापी अभियान में पारदर्शिता और सहभागिता पर जोर
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची की शुद्धता और मतदाता जागरूकता को लेकर मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय द्वारा उठाए जा रहे कदम लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूती प्रदान करते हैं। वर्ष 2003 की मतदाता सूची में अपना या अपने परिजनों का नाम खोजने की प्रक्रिया समझाने वाला वीडियो जारी करना एक महत्वपूर्ण एवं दूरदर्शी पहल है। यह न केवल तकनीकी रूप से नागरिकों को सक्षम बनाता है, बल्कि मतदाता सूची में सुधार को सरल, पारदर्शी और जनसुलभ बनाता है।
राज्य स्तर पर चल रहे इस अभियान का उद्देश्य मतदाताओं को सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना है। निर्वाचन आयोग स्पष्ट कर चुका है कि मतदाता सूची की शुद्धता किसी भी चुनाव की विश्वसनीयता की नींव है। इसलिए इस प्रक्रिया में लापरवाही या विलंब लोकतांत्रिक मूल्यों को आघात पहुंचा सकता है। यही कारण है कि पूरे प्रदेश में अधिकारियों व कर्मचारियों को समयबद्ध कार्यवाही के निर्देश दिए गए हैं।
मतदाता सूची सिर्फ नामों का संकलन नहीं है—यह उस जनता की पहचान है, जिसके बल पर लोकतंत्र कार्य करता है। यदि किसी पात्र नागरिक का नाम सूची से बाहर रह जाए या किसी प्रविष्टि में त्रुटि हो, तो उसका सीधा प्रभाव चुनावी व्यवस्था पर पड़ता है। ऐसे में सीईओ कार्यालय की यह पहल जन-भागीदारी बढ़ाने और लोगों को प्रक्रिया से जोड़ने की दिशा में अत्यंत प्रभावशाली है।
राज्य प्रशासन ने भी जनता से अपील की है कि वे जारी किए गए वीडियो को देखें, प्रक्रिया को समझें और आवश्यकता होने पर अपनी प्रविष्टियों को सत्यापित व संशोधित कराएं। यह सामूहिक जागरूकता ही सुनिश्चित करेगी कि आगामी चुनाव एक अधिक सटीक, पारदर्शी और निष्पक्ष मतदाता सूची के आधार पर संपन्न हों।






