पिछड़ों,अतिपिछड़ों को मिला बड़ा प्रतिनिधित्व
पटना।
मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए अपने 101 उम्मीदवारों की पूरी सूची जारी कर दी है। पार्टी ने 15 अक्तूबर को पहली सूची में 57 और 16 अक्तूबर को दूसरी सूची में 44 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की।
सीएम नीतीश कुमार, जिन्होंने बिहार में जातीय जनगणना कराकर सामाजिक संतुलन की राजनीति को नया आयाम दिया, उन्होंने उम्मीदवारों के चयन में भी सामाजिक समीकरणों को बारीकी से साधा है। जदयू ने इस बार पिछड़े और अतिपिछड़े समाज से सबसे अधिक प्रतिनिधित्व दिया है।
जानकारी के अनुसार, 59 प्रत्याशी पिछड़े और अतिपिछड़े वर्ग से हैं — जिनमें 37 पिछड़े वर्ग और 22 अतिपिछड़ा वर्ग के उम्मीदवार शामिल हैं। वहीं, सामान्य वर्ग से 22, अनुसूचित जाति से 15, अल्पसंख्यक वर्ग से 4 और अनुसूचित जनजाति से 1 प्रत्याशी को टिकट मिला है।
कुल 101 प्रत्याशियों में 13 महिलाएं भी शामिल की गई हैं। जातीय संतुलन की दृष्टि से जदयू ने इस बार कुशवाहा समाज से 13, कुर्मी समाज से 12, राजपूत समाज से 10, भूमिहार समाज से 9, तथा यादव और धानुक समाज से 8-8 प्रत्याशियों को मैदान में उतारा है।
सूची में सीएम नीतीश कुमार के करीबी आनंद मोहन के बेटे चेतन आनंद और 2020 के विधानसभा चुनाव में निर्दलीय रूप से विजयी रहे सुमित सिंह का नाम भी शामिल है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार ने इस बार सभी वर्गों को साथ लेकर चलने की रणनीति पर जोर दिया है, ताकि सामाजिक समीकरण के दम पर एक बार फिर सत्ता में वापसी की जा सके।





