Lucknow| उत्तर प्रदेश की उच्च न्यायालय ने चित्रकूट स्थित जगतगुरू स्वामी राम भद्राचार्य दिव्यांग विश्वविद्यालय के कुलपति स्वामी राम भद्राचार्य के खिलाफ इंटरनेट मीडिया प्लेटफार्मों पर वायरल हो रहे कथित आपत्तिजनक वीडियो को 48 घंटे के भीतर हटाने का आदेश दिया है। इस आदेश का मकसद विश्वविद्यालय और समाज में गलत संदेश फैलाने वाले कंटेंट को रोकना बताया गया है।
हाईकोर्ट के आदेश में कहा गया है कि सोशल मीडिया पर ऐसे वीडियो अपलोड करना, जो किसी व्यक्ति या संस्था की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाते हों, गंभीर कानूनी अपराध है। अदालत ने संबंधित प्लेटफार्मों को भी नोटिस जारी किया है और उन्हें निर्देश दिया है कि वे वीडियो हटाने में पूरी सहयोग करें।
विशेषज्ञों का कहना है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया पर इस तरह की सामग्री तेजी से वायरल हो जाती है और इससे समाज में गलतफहमियां और अफवाहें फैल सकती हैं। ऐसे मामलों में अदालत की कार्रवाई से स्पष्ट संदेश जाता है कि किसी भी व्यक्ति या संस्था की मानहानि सहन नहीं की जाएगी।
विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वे आदेश का पालन करेंगे और सामाजिक तथा शैक्षणिक माहौल बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठाएंगे। साथ ही प्रशासन ने यह भी कहा कि कुलपति की छवि को लेकर किसी भी तरह की असत्य सामग्री के प्रसार को रोका जाएगा।
सूत्रों के अनुसार, हाईकोर्ट ने इस मामले में अदालत के समक्ष 48 घंटे के भीतर रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है। इस आदेश के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म दोनों पर कार्रवाई तेज हो गई है।
स्थानीय नागरिक और विद्यार्थी समुदाय इस फैसले का स्वागत कर रहे हैं। उनका कहना है कि इस प्रकार की कार्रवाई से न केवल शैक्षणिक संस्थानों की प्रतिष्ठा सुरक्षित रहेगी, बल्कि इंटरनेट पर फैल रही गलत जानकारियों पर भी अंकुश लगेगा।
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