पेरिस: पूरे फ्रांस (France) में हिंसक समूहों की पुलिस के साथ झड़प हुई और उन्होंने दुकानों में लूटपाट( looting) की। इस दौरान हुए देशव्यापी प्रदर्शनों में लाखों लोग शामिल हुए, जिन्होंने बढ़ती महंगाई और स्कूलों की खराब हालत का विरोध किया। अधिकारियों ने बताया कि शनिवार को कई शहरों में नकाबपोश समूहों ने आगजनी की और सिटी हॉल सहित कई सार्वजनिक इमारतों पर हमले किए।
मध्य फ्रांस के शहर लिमोज में, 19वीं सदी के सिटी हॉल में आग लग गई, जिससे उसकी छत ढह गई। हाउते-विएन के प्रीफेक्ट मौरिस बाराटे ने LCI टेलीविजन को बताया कि आग जानबूझकर लगाई गई थी, जिससे इमारत लगभग पूरी तरह नष्ट हो गई। रविवार तक आग पर काबू पा लिया गया। फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के कार्यालय के अनुसार, वे रविवार दोपहर को शीर्ष सरकारी अधिकारियों के साथ एक आपातकालीन बैठक करेंगे और रात 8 बजे देश को संबोधित करेंगे।
गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज़ ने ‘X’ पर लिखा, “विरोध करना एक मौलिक अधिकार है। लेकिन हिंसा के जरिए जानबूझकर और सामूहिक रूप से अव्यवस्था फैलाना मौलिक अधिकार नहीं है।” उन्होंने पेरिस, मार्सिले, ल्योन और बोर्डो सहित कई शहरों में सैकड़ों व्यवसायों में हुई लूटपाट की ओर इशारा किया। अधिकारियों के अनुसार, पूरे फ्रांस में लगभग 5,50,000 लोगों ने प्रदर्शनों में हिस्सा लिया, जबकि आयोजकों का दावा है कि यह संख्या लगभग 8,00,000 थी। नुनेज़ ने बताया कि 500 से अधिक पुलिस अधिकारी, जेंडरमे (सुरक्षा बल के जवान) और दमकलकर्मी घायल हुए हैं।
पेरिस पुलिस ने एक बयान में बताया कि दिल का दौरा पड़ने से एक व्यक्ति की मौत हो गई, हालांकि उन्होंने इस बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी। पेरिस अभियोजक कार्यालय ने कहा कि मामले की जांच की जा रही है। रविवार सुबह पेरिस के ‘प्लेस डे ला रिपब्लिक’ (Place de la République) के आसपास उखड़े हुए पत्थर, टूटी हुई दुकानों के सामने के हिस्से और बिखरे हुए कांच, वहां हुई घटनाओं की गवाही दे रहे थे। इस चौक के आसपास और शहर के केंद्र में कुछ अन्य पर्यटन और खरीदारी वाले इलाकों में लूटपाट और तोड़फोड़ की खबरें सामने आईं।
पेरिस पुलिस ने रविवार को बताया कि अकेले फ्रांसीसी राजधानी क्षेत्र में 855 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पेरिस अभियोजक कार्यालय के अनुसार, इनमें से 557 लोगों को पुलिस हिरासत में रखा गया है। 57 वर्षीय सरकारी कर्मचारी मैरी पेरेग्ने ने कहा, “मैं यहां हुई तबाही और हिंसा के स्तर को देखकर पूरी तरह स्तब्ध हूं।” उन्होंने हैरानी जताते हुए पूछा कि आखिर इस हंगामे की वजह क्या रही।
नुकसान का जायजा लेते हुए, कई लोगों ने ‘प्लेस डे ला रिपब्लिक’ में मौजूद मुख्य स्मारक – फ्रांस के प्रतीक ‘मैरिएन’ (Marianne) की प्रतिमा – के आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त आधार की तस्वीरें लीं। 74 वर्षीय जीन फॉइसी ने बताया कि वह विरोध प्रदर्शन में शामिल होना चाहते थे, लेकिन वहां “दंगा-रोधी पुलिस की एक दीवार और हर तरफ आग” देखकर वापस घर लौट आए।
उन्होंने कहा, “मैं बहुत डर गया था। मैं जन्म से ही पेरिस का रहने वाला हूं, इसलिए जब मैं यहां पहुंचा, तो मेरी आंखों में आंसू आ गए; यह देखकर मुझे बहुत बुरा लगा और बहुत दुख हुआ।” 26 वर्षीय मार्गो यूडे ने कहा कि वह इस विरोध प्रदर्शन का समर्थन करती हैं, लेकिन “उन्होंने नहीं सोचा था कि यह इस हद तक बढ़ जाएगा।” उन्होंने कहा, “यहां उपद्रवी लोग आ गए थे, और इससे मुझे बहुत दुख होता है क्योंकि इससे इस आंदोलन की साख पर बट्टा लगता है।”


