मेट्रो और इंटरनेट सेवाएं बाधित न करने के निर्देश; अधिकारियों से मांगा जवाब
दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रदर्शन से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट की स्पेशल बेंच ने रविवार को सुनवाई करते हुए मेट्रो सेवाओं, इंटरनेट और आम लोगों की आवाजाही को लेकर अहम निर्देश दिए। कोर्ट ने कहा कि मेट्रो सेवाएं सामान्य रूप से चलनी चाहिए, इंटरनेट सेवाओं में बाधा नहीं आनी चाहिए और लोगों को आने-जाने से नहीं रोका जाना चाहिए। यह सुनवाई प्रदर्शन के दौरान कथित प्रतिबंधों, मेट्रो और ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित होने तथा प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिए जाने से संबंधित याचिकाओं पर हुई। मामले में याचिकाकर्ताओं ने अदालत के पहले दिए गए निर्देशों का पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाया।
याचिकाकर्ताओं के अनुसार, 9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया था कि प्रदर्शन के कारण दिल्ली आने वाली मेट्रो और ट्रेनों की आवाजाही पर पूरी तरह रोक नहीं लगाई जाए। हालांकि, याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि शनिवार को इन निर्देशों का उल्लंघन किया गया और लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ा। उनका कहना था कि सार्वजनिक परिवहन और इंटरनेट जैसी आवश्यक सेवाओं को बाधित करने से आम नागरिकों की रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो सकती है। इन आरोपों पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित दिल्ली अधिकारियों को नोटिस जारी किया और मंगलवार तक जवाब दाखिल करने को कहा।
सुनवाई के दौरान अदालत ने अधिकारियों से यह भी पूछा कि उसके आदेश की कथित अवहेलना करने के मामले में उनके खिलाफ अवमानना की कार्रवाई क्यों न शुरू की जाए। अवमानना की कार्रवाई का उद्देश्य अदालत के आदेशों के पालन को सुनिश्चित करना होता है। अब संबंधित अधिकारियों के जवाब के आधार पर मामले में आगे की कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है। अदालत के निर्देशों के केंद्र में सार्वजनिक परिवहन का सामान्य संचालन, इंटरनेट सेवाओं की उपलब्धता और नागरिकों की स्वतंत्र आवाजाही बनाए रखना शामिल है। हालांकि, अधिकारियों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई होगी या नहीं, इस पर अंतिम निर्णय आगे की न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगा।
इस मामले में इससे पहले मजिस्ट्रेट कोर्ट ने CJP नेताओं अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को रविवार सुबह करीब 10 बजे रिहा करने का आदेश दिया था। उपलब्ध विवरण के अनुसार, तीनों लगभग 23 घंटे पुलिस हिरासत में रहे। उनकी रिहाई का आदेश ऐसे समय आया, जब प्रदर्शन से जुड़े प्रतिबंधों और हिरासत की कार्रवाई को लेकर न्यायिक स्तर पर सुनवाई चल रही थी। अब सभी की नजर मंगलवार तक अधिकारियों की ओर से दिए जाने वाले जवाब और सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई पर रहेगी। इस मामले में अंतिम स्थिति अदालत के आदेशों और संबंधित पक्षों के जवाब के बाद ही स्पष्ट होगी।


