नॉर्वे: नोबेल शांति पुरस्कार का ऐलान हो गया है। नॉर्वे की नोबेल समिति ने 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार (Nobel Peace Prize) दक्षिण अफ्रीका की न्यायविद् नवनीतम नवी पिल्लै (Navanethem Navi Pillay) को देने का ऐलान किया है। पिल्लई को शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून को बढ़ावा देने के उनके प्रयासों के लिए इस सम्मान से नवाजा जाएगा। भारतीय तमिल मूल के परिवार में जन्मीं पिल्लै ने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ लड़ने वाले नेल्सन मंडेला समेत कई लोगों की कानूनी मदद की थी।
नोबेल शांति पुरस्कार का ऐलान होने के साथ ही एक बार फिर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सपना टूट गया है। ट्रंप कई बार , नोबेल शांति पुरस्कार पाने की इच्छा कई बार जाहिर कर चुके है। साथ ही पिछले तीन साल से दावेदारी पेश कर रहे हैं। हालांकि इस बार भी उन्हें ट्रंप का दिल टूट गया है।
शांति का नोबेल प्राइज विजेता की घोषणा करते हुए, नोबेल प्राइज कमेटी के X हैंडल से से जो पोस्ट शेयर किया। इसमें लिखा-नवी पिल्लै हमारे समय में अंतरराष्ट्रीय कानूनी सिद्धांतों की महान पैरोकारों में से एक हैं। उनका शानदार करियर हमें वैश्विक स्तर पर कानून के शासन का समर्थन करने, उसे मजबूत करने और उसका विस्तार करने की जरूरत की याद दिलाता है।
नवी पिल्लै ने देशों और राष्ट्रीय नेताओं को ज़िम्मेदार ठहराया है और हिंसा और संघर्ष के पीड़ितों के लिए उम्मीद जगाई है। नवी पिल्लै हमारे समय में अंतरराष्ट्रीय कानूनी सिद्धांतों के महान रक्षकों में से एक हैं। उनका शानदार करियर हमें दुनिया भर में कानून के शासन को सपोर्ट करने, मज़बूत करने और बढ़ाने की ज़रूरत की याद दिलाता है। न्याय और इंसानी सम्मान के लिए नवी पिल्लै का कमिटमेंट उन सभी के लिए उम्मीद और प्रेरणा का ज़रिया है जो एक ज़्यादा शांतिपूर्ण दुनिया बनाना चाहते हैं।
साहित्य, रसायन विज्ञान, भौतिकी और चिकित्सा के बाद यह शांति पुरस्कार इस सप्ताह दिया जाने वाला पांचवां नोबेल पुरस्कार है। शांति के लिए नोबल जीतने वाली नावी पिल्लै को 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोना (करीब 11.66 करोड़ रुपए) भी मिलेंगे. उन्हें 10 दिसंबर को ओस्लो में प्राइज दिया जाएगा। 2025 में वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरिना माचाडो ने यह प्राइज जीता था।
बता दें कि तमिल मूल की नवी पिल्लै का जन्म दक्षिण अफ्रीका के डरबन में हुआ था। उस समय वहां रंगभेद लागू था। इस व्यवस्था में लोगों के साथ उनके रंग और नस्ल के आधार पर भेदभाव किया जाता था। पिल्लै ने दक्षिण अफ्रीका में रंगभेद के खिलाफ लड़ने वाले नेल्सन मंडेला समेत कई लोगों की कानूनी मदद की थी। पिल्लै ने वकील बनकर इस व्यवस्था का विरोध करने वालों की मदद की। नवी दक्षिण अफ्रीका के हाईकोर्ट की जज रह चुकी हैं। वह रवांडा इंटरनेशनल क्रिमिनल ट्रिब्यूनल में जज भी रही हैं।


