नई दिल्ली। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर याचिका पर सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई। अदालत ने उन्हें तत्काल निलंबित करने से इनकार करते हुए चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर जवाब मांगा। कोर्ट ने कहा कि पहले आयोग का पक्ष और संबंधित रिकॉर्ड देखना जरूरी है। यदि रिकॉर्ड से यह साबित हुआ कि चुनाव आयोग में जरूरी प्रक्रिया का पालन किए बिना फैसले लिए गए, तो उन फैसलों पर रोक लगाने या उन्हें वापस लेने पर विचार किया जा सकता है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने फॉर्म-6 में किए गए बदलाव को लेकर चुनाव आयोग के दावे पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फॉर्म-6 में किसी संशोधन को मंजूरी नहीं दी है। इसके बाद चुनाव आयोग ने सफाई दी कि 24 जून 2025 के बिहार विशेष गहन पुनरीक्षण आदेश के दौरान फॉर्म-6 के साथ एक घोषणा जोड़ी गई थी और आयोग के मुताबिक सुप्रीम कोर्ट के 27 मई के आदेश में इसे सही ठहराया गया था।
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि तीन सदस्यीय चुनाव आयोग में फैसले सर्वसम्मति या बहुमत से होने चाहिए। किसी एक सदस्य द्वारा अकेले लिया गया फैसला पूरे आयोग का फैसला नहीं माना जा सकता। हालांकि अदालत ने कहा कि अभी केवल आरोपों के आधार पर यह नहीं माना जा सकता कि सभी फैसले मुख्य चुनाव आयुक्त ने अकेले लिए हैं। इसके लिए आयोग के रिकॉर्ड की जांच जरूरी होगी।
यह मामला विशेष गहन पुनरीक्षण यानी एसआईआर से जुड़े फैसलों को लेकर सामने आया है। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि मुख्य चुनाव आयुक्त ने अन्य दो चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना करीब 14 फैसले लिए। अदालत ने इन आरोपों पर तत्काल कार्रवाई करने के बजाय चुनाव आयोग से जवाब मांगा है।
सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा कि केवल मीडिया रिपोर्ट के आधार पर किसी संवैधानिक पदाधिकारी को निलंबित करने का अंतरिम आदेश नहीं दिया जा सकता, क्योंकि खबर पूरी तरह सही, आंशिक रूप से सही या गलत हो सकती है। पहले आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित पक्ष का जवाब देखना जरूरी है।
वहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की संवैधानिक प्रक्रिया को लेकर भी बहस तेज है। अनुच्छेद 324 के तहत मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने के लिए संसद की विशेष प्रक्रिया निर्धारित है। विपक्ष पहले भी ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव की मांग कर चुका है। ऐसे में सुप्रीम कोर्ट की ताजा सुनवाई ने एसआईआर और चुनाव आयोग के फैसलों को लेकर चल रहे विवाद को और गंभीर बना दिया है।


