नई दिल्ली। एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा है कि तेजस लड़ाकू विमानों की डिलीवरी में हो रही देरी से भारतीय वायुसेना को नुकसान हो रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सुरक्षा चुनौतियों के बीच वायु शक्ति की जरूरत लगातार बढ़ रही है, जबकि वायुसेना के लड़ाकू विमानों के स्क्वॉड्रन की संख्या घटकर 29 रह गई है। वायुसेना के लिए 42 स्क्वॉड्रन की मंजूर संख्या है।
एयर चीफ मार्शल ने बताया कि अगले कुछ वर्षों तक वायुसेना को हर साल करीब 36 से 40 नए लड़ाकू विमानों की जरूरत होगी। उन्हें उम्मीद है कि तेजस मार्क-1ए और फ्रांस से प्रस्तावित राफेल विमानों की आपूर्ति से वायुसेना की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
भारत ने फरवरी 2021 में एचएएल के साथ 83 तेजस मार्क-1ए विमानों के लिए करीब 48 हजार करोड़ रुपये का समझौता किया था। इन विमानों की पहली खेप मार्च 2024 में मिलने की उम्मीद थी, लेकिन अब तक वायुसेना को एक भी विमान नहीं मिला है। पिछले साल सितंबर में 97 और तेजस मार्क-1ए विमानों के लिए करीब 62,370 करोड़ रुपये का समझौता किया गया था।
एयर चीफ ने कहा कि 114 राफेल विमानों की प्रस्तावित खरीद पर इसी वित्त वर्ष में समझौता करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह प्रक्रिया दोनों पक्षों के बीच बातचीत पर निर्भर है। वायुसेना तेजस मार्क-1ए के अलावा तेजस मार्क-2 और स्वदेशी एएमसीए लड़ाकू विमानों का भी इंतजार कर रही है।
थिएटर कमांड को लेकर एयर चीफ ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के अनुभवों के बाद इस व्यवस्था पर नए नजरिए से चर्चा हो रही है। उन्होंने कहा कि वायुसेना थिएटर कमांड के खिलाफ नहीं है और सरकार के सामने उपलब्ध विकल्प रखे जाएंगे। अंतिम फैसला सरकार को करना है। प्रस्तावित थिएटराइजेशन के तहत थलसेना, नौसेना और वायुसेना की क्षमताओं को एकीकृत कर क्षेत्रवार सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की योजना है।


