– जाति और मूल निवास प्रमाणपत्र में पिता का नाम-पता जरूरी
– मायके के आधार पर मिलेगा आरक्षण
पटना। बिहार में शिक्षक नियुक्ति परीक्षा टीआरई-4 में शामिल होने वाली विवाहित महिला अभ्यर्थियों के लिए जाति एवं आरक्षण से जुड़े नियम स्पष्ट किए गए हैं। नई व्यवस्था के तहत विवाहित महिला अभ्यर्थी की जाति और मूल निवास का निर्धारण उसके जन्म एवं मायके के आधार पर किया जाएगा।
नियमों के अनुसार, विवाह के बाद महिला का निवास यदि बिहार में हो गया है, तो केवल पति के निवास के आधार पर उसे आरक्षण का लाभ नहीं मिलेगा। आरक्षण का दावा करने के लिए उसके जाति एवं मूल निवास प्रमाणपत्र में पिता का नाम और मायके का पता दर्ज होना आवश्यक होगा।
ओबीसी और ईबीसी वर्ग की महिला अभ्यर्थियों को आरक्षण का लाभ लेने के लिए नॉन-क्रीमी लेयर (एनसीएल) प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना होगा। यह प्रमाणपत्र निर्धारित प्रक्रिया के तहत सक्षम अधिकारी से जारी होना जरूरी है। वहीं एससी और एसटी वर्ग की अभ्यर्थियों को भी अपने आरक्षण संबंधी प्रमाणपत्र प्रस्तुत करने होंगे।
आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) से संबंधित विवाहित महिला अभ्यर्थियों के मामले में आय प्रमाणपत्र पति के निवास क्षेत्र के आधार पर बनाए जाने की व्यवस्था बताई गई है। हालांकि जाति और मूल निवास की पात्रता का निर्धारण पिता एवं मायके से जुड़े दस्तावेजों के आधार पर ही किया जाएगा।
यदि किसी महिला का मूल निवास बिहार के बाहर है और विवाह के बाद वह बिहार में रहने लगी है, तो केवल विवाह के आधार पर उसे बिहार की आरक्षण व्यवस्था का लाभ नहीं मिलेगा। ऐसी अभ्यर्थियों को संबंधित भर्ती के नियमों के अनुसार अपनी श्रेणी में आवेदन करना होगा।
बिहार में महिला अभ्यर्थियों के लिए 35 प्रतिशत क्षैतिज आरक्षण लागू है। शिक्षक भर्ती में आरक्षण का लाभ लेने वाली विवाहित महिलाओं के लिए दस्तावेजों की सही स्थिति इसलिए महत्वपूर्ण हो गई है।


