– चार लोगों को 10 दिन थाने में रखने पर 65 हजार मुआवजा
– जिम्मेदार एसएचओ की सैलरी से होगी वसूली
प्रयागराज/देवरिया। देवरिया के गौरी बाजार थाने में चार लोगों को कथित रूप से गैरकानूनी तरीके से हिरासत में रखने के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है। अदालत ने चारों याचिकाकर्ताओं को कुल 65 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया है और यह राशि जिम्मेदार पुलिस अधिकारी के वेतन से वसूलने के निर्देश दिए हैं।
मामला गौरी बाजार थाना, जनपद देवरिया से जुड़ा है। याचिकाकर्ताओं का आरोप था कि उन्हें अप्रैल 2026 में कई दिनों तक पुलिस हिरासत में रखा गया और उन्हें निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के तहत मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया। कोर्ट के अनुसार याचिकाकर्ता संख्या 2, 3 और 4 को करीब 10 दिन तथा याचिकाकर्ता संख्या 1 को करीब दो दिन गैरकानूनी हिरासत में रखा गया।
मामले की सुनवाई के दौरान थाने की सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं होने का मुद्दा भी सामने आया। तत्कालीन एसएचओ डॉ. महेंद्र कुमार ने बताया कि सीसीटीवी सिस्टम 12 अप्रैल को खराब हो गया था और बाद में उसे ठीक कराया गया। हालांकि, कोर्ट के समक्ष सीसीटीवी ठीक किए जाने से संबंधित जनरल डायरी में कोई स्पष्ट प्रविष्टि नहीं मिली। अदालत ने इस स्थिति को गंभीरता से लिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि जब सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध नहीं है और हिरासत तथा रिहाई के संबंध में समकालीन पुलिस रिकॉर्ड भी पर्याप्त नहीं है, तो अदालत प्रतिकूल निष्कर्ष निकाल सकती है। कोर्ट ने पुलिस थानों में सीसीटीवी व्यवस्था खराब होने की स्थिति में प्रत्येक व्यक्ति के आने-जाने का स्पष्ट रिकॉर्ड रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति दिवेश चंद्र सामंत की पीठ ने याचिकाकर्ता संख्या 2, 3 और 4 को 20-20 हजार रुपये, जबकि याचिकाकर्ता संख्या 1 को 5 हजार रुपये मुआवजा देने का निर्देश दिया। इस प्रकार कुल राशि 65 हजार रुपये होती है। अदालत ने निर्देश दिया कि जांच के बाद जिम्मेदारी तय कर मुआवजे की राशि संबंधित अधिकारी के वेतन से वसूली जाए। साथ ही तत्कालीन एसएचओ के आचरण को उनकी सर्विस बुक में दर्ज करने का निर्देश भी दिया गया।
अदालत ने मामले में तत्कालीन एसएचओ डॉ. महेंद्र कुमार की भूमिका पर कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि उनके आचरण से याचिकाकर्ताओं के अधिकारों का उल्लंघन हुआ। कोर्ट ने पुलिस से यह भी स्पष्ट करने को कहा कि सीसीटीवी खराब होने और उसकी मरम्मत के संबंध में आवश्यक रिकॉर्ड क्यों नहीं रखा गया।


