30 C
Lucknow
Tuesday, September 29, 2026

मंडी का डिजिटल आईना और किसान के फैसले की ताकत

Must read

 

कृषि केवल खेत में फसल उगाने तक सीमित नहीं है। किसान के लिए उतना ही महत्वपूर्ण यह जानना भी है कि उसकी उपज बाजार में किस कीमत पर बिक रही है, किस मंडी में मांग अधिक है और कहां उसकी उपज का बेहतर मूल्य मिल सकता है। लंबे समय से बाजार की सही और समयबद्ध जानकारी का अभाव किसान के सामने एक बड़ी चुनौती रहा है। ऐसे में उत्तर प्रदेश की सभी 251 कृषि उपज मंडियों का राष्ट्रीय कृषि बाजार सूचना नेटवर्क एगमार्कनेट 2.0 से जुड़ना डिजिटल कृषि व्यवस्था की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

ई-मंडी पोर्टल का एपीआई आधारित एकीकरण होने के बाद प्रदेश की मंडियों से भाव और आवक संबंधी सूचनाएं राष्ट्रीय स्तर के डिजिटल नेटवर्क पर उपलब्ध हो सकेंगी। इसका वास्तविक महत्व केवल तकनीकी उपलब्धि में नहीं, बल्कि उस सूचना में है जो अंततः किसान के निर्णय को प्रभावित कर सकती है।

आज किसान के सामने सबसे बड़ा सवाल अक्सर यही होता है,फसल कहां बेचें और किस भाव पर बेचें? यदि उसे अलग-अलग मंडियों के भाव और वहां पहुंच रही कृषि उपज की मात्रा की विश्वसनीय जानकारी समय पर मिलती है, तो वह बाजार की स्थिति को समझकर अपनी उपज के विपणन की बेहतर योजना बना सकता है। हालांकि केवल ऑनलाइन भाव उपलब्ध करा देना पर्याप्त नहीं होगा। जरूरी यह भी है कि आंकड़े नियमित, सही और समयबद्ध हों तथा किसान तक उन्हें समझने योग्य रूप में पहुंचाया जाए।
उत्तर प्रदेश की 251 मंडियों से 100 प्रतिशत मार्केट रिपोर्टिंग का दावा इस व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण कड़ी है। जितना व्यापक और नियमित डेटा उपलब्ध होगा, उतना ही कृषि बाजार के रुझानों को समझना आसान होगा। इससे किसानों के अलावा व्यापारियों, कृषि विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं को भी बाजार की तस्वीर समझने में मदद मिल सकती है।
लेकिन डिजिटल व्यवस्था की सफलता का असली पैमाना पोर्टल पर आंकड़ों की मौजूदगी नहीं, बल्कि किसान के हाथ में सूचना की उपयोगिता होगी। गांव का किसान यदि मोबाइल पर मंडी भाव देख तो पाए, लेकिन यह न समझ पाए कि किस मंडी में जाना उसके लिए आर्थिक रूप से लाभकारी होगा, तो डिजिटल क्रांति अधूरी ही मानी जाएगी। इसलिए आवश्यक है कि बाजार सूचना को स्थानीय भाषा, सरल माध्यम और मोबाइल आधारित सुविधाओं के जरिए किसानों तक पहुंचाया जाए।
दूसरी चुनौती आंकड़ों की विश्वसनीयता की है। मंडी भाव और आवक के आंकड़े जितने सटीक और ताजा होंगे, किसान के फैसले उतने ही उपयोगी होंगे। डिजिटल प्रणाली में तकनीकी खामियों, विलंबित अपडेट या गलत रिपोर्टिंग की गुंजाइश कम से कम होनी चाहिए। इसके लिए नियमित निगरानी और जवाबदेही भी उतनी ही आवश्यक है जितना तकनीकी एकीकरण।
यह भी ध्यान रखना होगा कि बाजार केवल आंकड़ों से संचालित नहीं होता। परिवहन लागत, भंडारण की सुविधा, स्थानीय मांग, फसल की गुणवत्ता और भुगतान की व्यवस्था जैसे अनेक कारक किसान के अंतिम लाभ को प्रभावित करते हैं। इसलिए एगमार्कनेट जैसी व्यवस्था को कृषि विपणन सुधारों की व्यापक श्रृंखला का हिस्सा बनाना होगा।
उत्तर प्रदेश की सभी 251 मंडियों को राष्ट्रीय नेटवर्क से जोड़ने की पहल का सबसे बड़ा संदेश यही है कि कृषि बाजार में सूचना अब केवल बिचौलियों या सीमित स्थानीय स्रोतों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। जिस किसान के पास सही जानकारी होगी, उसके पास बाजार में बातचीत और निर्णय लेने की बेहतर क्षमता भी होगी।
डिजिटल मंडी व्यवस्था तभी वास्तव में सफल मानी जाएगी, जब तकनीक सरकारी पोर्टल की उपलब्धि से आगे बढ़कर खेत में खड़े किसान के लिए उपयोगी साधन बने। आंकड़े स्क्रीन पर नहीं, किसान के निर्णय में दिखाई देने चाहिए। यही डिजिटल कृषि व्यवस्था की वास्तविक परीक्षा होगी।

Must read

More articles

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Latest article