लखनऊ। करीब 65 साल पहले वर्ष 1959 में अधिग्रहित की गई जमीन का पूरा मुआवजा नहीं मिलने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने लखनऊ के अपर जिलाधिकारी (भूमि अधिग्रहण) और मुख्य कोषागार अधिकारी (CTO) को 6 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने का निर्देश दिया है।
मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की पीठ ने की। अदालत ने अधिकारियों से यह स्पष्ट करने को कहा है कि भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण के आदेशों का अनुपालन क्यों नहीं हुआ और इसके लिए उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए।
कोर्ट के समक्ष बताया गया कि जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया 1959 में हुई थी, जबकि मुआवजे की वसूली से संबंधित कार्यवाही 2019 तक लंबित रही। इसके बावजूद याचिकाकर्ता को अब तक पूरा भुगतान नहीं मिल सका। उपलब्ध जानकारी के अनुसार अब तक केवल 11.72 लाख रुपये का भुगतान किया गया है, जबकि अगस्त 2025 तक प्राधिकरण के अनुसार 38,25,567.67 रुपये का भुगतान किया जाना था।
हाईकोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को निर्धारित करते हुए दोनों अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्थिति स्पष्ट करने का आदेश दिया है।
क्रॉसर
➡️ 1959 में अधिग्रहित जमीन, 65 साल बाद भी पूरा मुआवजा नहीं
➡️ हाईकोर्ट ने ADM भूमि अधिग्रहण और CTO को किया तलब
➡️ 6 अक्टूबर को दोनों अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से होना होगा पेश
➡️ 2019 से मुआवजा संबंधी कार्यवाही लंबित रहने पर कोर्ट नाराज


