– नेपाल में 21 मौतें, मनांग में हिमस्खलन से 2 की जान गई
– यूपी में 56 लोगों की मौत, हजार से ज्यादा मकान क्षतिग्रस्त
नई दिल्ली/लखनऊ। नेपाल से लेकर उत्तर प्रदेश और ओडिशा तक लगातार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। कई इलाकों में बाढ़, भूस्खलन और जलभराव की स्थिति बनी हुई है। पड़ोसी देश नेपाल में पिछले चार दिनों की भारी बारिश से जुड़ी घटनाओं में कम से कम 21 लोगों की मौत हुई है, जबकि पांच लोग लापता बताए गए हैं। भूस्खलन से कई स्थानों पर नदियों का प्रवाह भी बाधित हुआ है।
नेपाल के मनांग जिले में हिमलुंग हिमाल बेस कैंप पर हिमस्खलन की घटना में दो शव बरामद किए गए हैं। शुरुआती रिपोर्टों में करीब 12 लोगों के लापता होने की बात सामने आई थी, जिनमें से दो के शव मिलने के बाद 10 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव अभियान मौसम की खराब स्थिति और दुर्गम इलाके के कारण चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
उत्तर प्रदेश में 25 से 27 सितंबर के बीच भारी बारिश और आंधी-तूफान से संबंधित घटनाओं में 56 लोगों की मौत और 46 लोग घायल हुए हैं। सरकारी आंकड़ों के अनुसार राज्य के 75 में से 56 जिलों में अत्यधिक बारिश दर्ज की गई। करीब 1,021 मकानों को नुकसान पहुंचा है और 107 पशुओं की भी मौत हुई है।
फर्रुखाबाद में बारिश सामान्य से 7,385 प्रतिशत अधिक दर्ज की गई, जबकि कन्नौज में यह आंकड़ा 5,664 प्रतिशत रहा। कई जिलों में नदियों के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी के कारण बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। घाघरा और राप्ती समेत कई नदियां चेतावनी अथवा खतरे के निशान के आसपास या उससे ऊपर बह रही हैं।
ओडिशा में महानदी नदी तंत्र में पानी का दबाव बढ़ने से निचले इलाकों में बाढ़ की आशंका जताई गई है। अधिकारियों के मुताबिक मुंडली से महानदी में पानी का प्रवाह 8 लाख क्यूसेक तक पहुंचने का अनुमान था। कटक, खुर्दा, पुरी और जगतसिंहपुर समेत कई जिलों के निचले इलाकों पर असर पड़ने की आशंका जताई गई।
लगातार बारिश के कारण ऋषिकेश के मुनि की रेती क्षेत्र में गंगा नदी में रिवर राफ्टिंग अनिश्चितकाल के लिए रोक दी गई है। अधिकारियों के मुताबिक नदी का जलस्तर और मौसम सामान्य होने के बाद ही गतिविधि दोबारा शुरू की जाएगी।
थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक में भी भारी बारिश से हालात बिगड़े हैं। करीब 48 घंटे की बारिश के बाद सड़कों और घरों में पानी भरने की स्थिति बनी, जिसके बाद राजधानी के सभी 50 जिलों को बाढ़ आपदा क्षेत्र घोषित किया गया।
बारिश का असर नेपाल, भारत और दक्षिण-पूर्व एशिया के कई हिस्सों में एक साथ दिखाई दे रहा है। राहत एवं बचाव टीमें प्रभावित क्षेत्रों में तैनात हैं और नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है।


