– घिलोई में स्लीपर बस बनी थी आग का गोला
– कई यात्रियों की हुई थी मौत
– हादसे के बाद अलग-अलग थानों में दर्ज हुए मुकदमे
फर्रुखाबाद/कन्नौज। छह वर्ष पहले 10 जनवरी 2020 की रात कन्नौज जिले के छिबरामऊ कोतवाली क्षेत्र के घिलोई गांव के पास जीटी रोड पर हुआ भीषण बस हादसा आज भी कई सवाल छोड़ गया है। फर्रुखाबाद से जयपुर जा रही चतुर्वेदी बस सर्विस की स्लीपर बस की ट्रक से भिड़ंत के बाद आग लग गई थी। आग इतनी भीषण थी कि बस में फंसे कई यात्रियों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला और उनकी जिंदा जलने से मौत हो गई।
समकालीन रिपोर्टों में हादसे में मृतकों की संख्या अलग-अलग बताई गई थी। बाद की रिपोर्टों में 10 लोगों की मौत का उल्लेख किया गया। हादसे के बाद बस की संरचना, स्लीपर में किए गए परिवर्तन, परमिट और परिवहन विभाग की निगरानी को लेकर भी गंभीर सवाल उठे थे।
घने कोहरे में हुई थी टक्कर
रिपोर्टों के मुताबिक 10 जनवरी की रात करीब साढ़े आठ बजे बस घिलोई गांव के पास पहुंची थी। उस समय घना कोहरा था। आरोप था कि बस चालक तेज गति और लापरवाही से वाहन चला रहा था। इसी दौरान बस की ट्रक से टक्कर हो गई। टक्कर के बाद दोनों वाहनों में आग फैल गई और देखते ही देखते स्लीपर बस आग की लपटों में घिर गई।
बस में मौजूद कई यात्रियों ने किसी तरह खिड़कियों और दरवाजे से बाहर निकलकर जान बचाई, लेकिन स्लीपर बर्थ पर मौजूद यात्रियों को संभलने का पर्याप्त समय नहीं मिला। कई यात्री बस के अंदर ही फंस गए।
बस की संरचना पर उठे थे सवाल
हादसे के बाद हुई जांच में बस को सामान्य यात्री बस से स्लीपर बस में परिवर्तित किए जाने की बात सामने आई थी। रिपोर्टों में बस में 49 सीट और 12 स्लीपर बर्थ होने का उल्लेख किया गया।
बस की खिड़कियों और आपातकालीन निकास की व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठे थे। जांच में यह भी सामने आया था कि बस की मूल संरचना में परिवर्तन किए गए थे। हादसे के बाद यही सवाल सबसे महत्वपूर्ण बना कि यदि बस में पर्याप्त आपातकालीन निकास होता तो कितने यात्रियों की जान बच सकती थी।
11 जनवरी को दर्ज हुई पहली एफआईआर
हादसे के अगले दिन 11 जनवरी 2020 को बस में सवार फर्रुखाबाद के कमालगंज थाना क्षेत्र के पट्टी कतरौली निवासी राहुल पुत्र जयसिंह की ओर से छिबरामऊ कोतवाली में बस के अज्ञात चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
रिपोर्ट में चालक पर तेज गति और लापरवाही से बस चलाने का आरोप लगाया गया था। इसके बाद ट्रक मालिक भूपेंद्र सिंह निवासी जहांगीरपुरी, दिल्ली की ओर से भी बस के अज्ञात चालक के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई।
बस मालकिन और एजेंटों पर भी मुकदमा
हादसे के करीब चार दिन बाद परिवहन विभाग की ओर से कार्रवाई की गई। एआरटीओ कन्नौज संजय कुमार झा की तहरीर पर बस मालकिन प्रीति चतुर्वेदी और एजेंटों समेत चार लोगों के खिलाफ छिबरामऊ कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया।
रिपोर्टों के अनुसार मुकदमे में गैर इरादतन हत्या, धोखाधड़ी, जालसाजी, दस्तावेजों में हेरफेर और आपराधिक षड्यंत्र जैसी धाराएं लगाई गई थीं। बस की मूल संरचना में बदलाव तथा परमिट की शर्तों के विपरीत संचालन जैसे आरोप भी जांच के दायरे में आए थे।
17 बसों की फाइलों ने बढ़ाए सवाल
हादसे के बाद परिवहन विभाग ने चतुर्वेदी बस सर्विस से जुड़ी बसों की जांच शुरू की। जांच के दौरान सामान्य बसों को स्लीपर बसों में परिवर्तित किए जाने का मामला सामने आया। रिपोर्टों के अनुसार ऐसी 17 बसों की फाइलें जांच के दायरे में आई थीं।
फर्रुखाबाद एआरटीओ कार्यालय से इन बसों से संबंधित कुछ फाइलें नहीं मिलने का मामला भी सामने आया। फाइलों के गायब होने के संबंध में फतेहगढ़ कोतवाली में अलग मुकदमा दर्ज कराया गया था।
दो एआरटीओ पर भी दर्ज हुआ था मुकदमा
जांच आगे बढ़ने पर तत्कालीन एआरटीओ मोहम्मद हसीब और शांतिभूषण पांडेय की भूमिका पर भी सवाल उठे। 19 फरवरी 2020 को आरटीओ प्रवर्तन कानपुर की ओर से दोनों के खिलाफ फतेहगढ़ कोतवाली में गैर इरादतन हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया था।
आरोप था कि सामान्य बसों को स्लीपर बसों में परिवर्तित करने की प्रक्रिया में परिवहन विभाग की भूमिका रही थी। हालांकि पुलिस विवेचना के बाद दोनों अधिकारियों को क्लीनचिट दिए जाने और मुकदमे में फाइनल रिपोर्ट लगाए जाने की बात सामने आई।
छह साल बाद भी वही सवाल
हादसे को छह वर्ष बीत चुके हैं, लेकिन इस घटना ने निजी स्लीपर बसों की फिटनेस, बसों की मूल संरचना में बदलाव, आपातकालीन निकास, परमिट की शर्तों, यात्रियों की सुरक्षा और परिवहन विभाग की निगरानी से जुड़े कई सवाल खड़े किए थे।


