– ग्रीन गैस बिल जमा कराने के नाम पर जालसाजों ने उड़ाए 23.14 लाख रुपये
– साइबर क्राइम थाने में एफआईआर
लखनऊ। राजधानी में ग्रीन गैस के बिल के नाम पर साइबर ठगी का एक और गंभीर मामला सामने आया है। इस बार जालसाजों ने एक सेवानिवृत्त पीसीएस अधिकारी को निशाना बनाकर उनके बैंक खाते और फिक्स्ड डिपॉजिट से कुल 23.14 लाख रुपये निकाल लिए। मामले में पीड़ित ने साइबर क्राइम थाने में शिकायत दर्ज कराई, जिसके आधार पर एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है।
जानकारी के अनुसार, पीड़ित कृपा शंकर मिश्रा को 20 सितंबर को फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को ग्रीन गैस कंपनी का कर्मचारी बताते हुए बिल जमा न होने की बात कही। जालसाज ने भुगतान के नाम पर पीड़ित को एक APK फाइल भेजी। आरोप है कि फाइल के जरिए मोबाइल तक पहुंच हासिल करने के बाद साइबर ठगों ने बैंक खाते से रकम निकालनी शुरू कर दी।
रिपोर्ट के मुताबिक, साइबर ठगों ने पीड़ित के बैंक खाते से 13.14 लाख रुपये और फिक्स्ड डिपॉजिट से 10 लाख रुपये निकाल लिए। इस तरह कुल 23.14 लाख रुपये की ठगी हुई।
घटना की जानकारी होने के बाद पीड़ित ने पुलिस और बैंक को सूचना दी। पुलिस ने ठगी की रकम में से 5.15 लाख रुपये फ्रीज कर वापस कराने में सफलता हासिल की है। बाकी रकम और आरोपियों के बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है।
लखनऊ में ग्रीन गैस के नाम पर साइबर ठगी के कई मामले सामने आ चुके हैं। जालसाज खुद को कंपनी का कर्मचारी बताकर उपभोक्ताओं को बिल बकाया होने, मीटर अपडेट न होने या कनेक्शन काटने की धमकी देते हैं। इसके बाद मोबाइल पर एपीके या संदिग्ध लिंक भेजकर बैंक संबंधी जानकारी हासिल करने अथवा मोबाइल का एक्सेस लेने की कोशिश की जाती है।
पुलिस ने लोगों से अपील की है कि अनजान नंबर से आने वाली APK फाइल या लिंक को डाउनलोड अथवा इंस्टॉल न करें और बिल संबंधी जानकारी के लिए ग्रीन गैस के अधिकृत माध्यमों से ही संपर्क करें।
फिलहाल साइबर क्राइम पुलिस मामले में बैंक ट्रांजेक्शन, मोबाइल नंबर और रकम जिन खातों में गई है, उनकी जानकारी के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।


