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Friday, September 25, 2026

सेवा करते-करते ही सेवा का संदेश दें, उपदेश नहीं : मोदी

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार को युवाओं से सेवा को जीवन और सार्वजनिक जीवन का मूल मंत्र बनाने का आह्वान किया। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ‘सेवा संकल्प अभियान’ के तहत वडनगर से वाराणसी जा रहे सेवा यात्रियों से संवाद करते हुए उन्होंने कहा कि सेवा का संदेश उपदेश देकर नहीं, बल्कि अपने आचरण और कार्यों के जरिए देना चाहिए। उन्होंने कहा, “सेवा करते-करते सेवा का संदेश देना है, सेवा का उपदेश नहीं देना है।”

प्रधानमंत्री ने कहा कि राजनीति में कितनी भी बड़ी सत्ता या ऊंचाई हासिल हो जाए, सेवा का रास्ता कभी नहीं छूटना चाहिए। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे देश के अलग-अलग हिस्सों में जाकर लोगों की समस्याओं, अनुभवों और आकांक्षाओं को करीब से समझें। उनके अनुसार, राष्ट्र निर्माण केवल नीतियों और योजनाओं से नहीं, बल्कि समाज से सीधे जुड़कर काम करने से मजबूत होता है।

मोदी ने बताया कि वडनगर और वाराणसी के बीच चल रहे इस सेवा अभियान में 20 टोलियां 10 राज्यों के 193 जिलों, 773 तहसीलों और 10,159 गांवों से होकर गुजर रही हैं। यात्रा करीब 35,576 किलोमीटर की है और इसके दौरान 380 रात्रि पड़ाव निर्धारित किए गए हैं। यात्रियों द्वारा ग्राम सभाओं, लाभार्थियों और आम नागरिकों से संवाद के साथ वृक्षारोपण, स्वच्छता अभियान, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अन्य सेवा गतिविधियां की जा रही हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत की परंपरा में यात्रा और सेवा दोनों का विशेष महत्व रहा है। ऐसी यात्राएं युवाओं में करुणा, विनम्रता, टीमवर्क और अनुशासन की भावना मजबूत करती हैं। उन्होंने यात्रियों से यात्रा के दौरान मिले लोगों, उनके अनुभवों और गांवों में किए जा रहे अच्छे कार्यों का दस्तावेज तैयार करने को कहा, ताकि एक क्षेत्र का सफल प्रयोग दूसरे क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी बन सके।

उन्होंने कहा कि राजनीति और चुनाव अपनी जगह हैं तथा शासन व्यवस्था अपनी जगह, लेकिन सेवा यात्री राष्ट्र निर्माण और विकसित भारत के संकल्प के साथ आगे बढ़ रहे हैं। वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण में युवाशक्ति की महत्वपूर्ण भूमिका बताते हुए मोदी ने कहा कि युवाओं को देश की विविधता, सामाजिक परिस्थितियों और स्थानीय जरूरतों को जमीन पर जाकर समझना होगा।

प्रधानमंत्री ने कहा कि जब शासन के मूल में सेवा का भाव होता है तो नीतियों के केंद्र में नागरिक रहते हैं। उन्होंने गरीबों के लिए मुफ्त अनाज, आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास, उज्ज्वला, पीएम किसान और पीएम सूर्य घर जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि सेवाभाव ही योजनाओं को अंतिम छोर तक पहुंचाने की प्रेरणा देता है। उन्होंने कहा, “सेवा परमो धर्मः, सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है।”

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