नई दिल्ली: दिल्ली नगर निगम (MCD) के दिलशाद गार्डन स्थित स्वामी दयानंद अस्पताल (Swami Dayanand Hospital) के डॉक्टरों ने दुर्लभ बीमारी से पीड़ित आठ वर्षीय बच्ची का सफल इलाज कर उसे नया जीवन दिया है। अस्पताल के बाल रोग विभाग की टीम ने गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (Guillain-Barré Syndrome) से पीड़ित बच्ची का उपचार किया। बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र सिंह बिष्ट ने बताया कि गुइलेन-बैरे सिंड्रोम एक दुर्लभ ऑटोइम्यून बीमारी है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से तंत्रिकाओं पर हमला करने लगती है, जिससे मरीज को कमजोरी समेत अन्य समस्याएं हो सकती हैं।
गुइलेन-बैरे सिंड्रोम एक दुर्लभ ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से स्वस्थ नसों पर हमला करने लगती है। इसके कारण नसों के काम करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है और मरीज को मांसपेशियों में कमजोरी, सुन्नपन या दर्द जैसी समस्याएं होने लगती हैं। आमतौर पर इसके लक्षण पैरों और हाथों से शुरू हो सकते हैं। कई मामलों में पैरों में कमजोरी बढ़ने के कारण मरीज को चलने-फिरने में परेशानी होने लगती है। बच्चों में भी यह बीमारी होने पर उनकी चलने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।
डॉक्टरों के मुताबिक, गुइलेन-बैरे सिंड्रोम के लक्षण अक्सर पैरों और हाथों से शुरू होकर धीरे-धीरे शरीर के ऊपरी हिस्सों तक फैल सकते हैं। कुछ मामलों में कमजोरी पैरों से बढ़ते हुए जांघों, हाथों और चेहरे तक पहुंच सकती है। गंभीर स्थिति में मरीज को सांस लेने में परेशानी हो सकती है और उसे वेंटिलेटर सपोर्ट की जरूरत पड़ सकती है।
बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. सुरेंद्र सिंह बिष्ट के अनुसार, बच्ची के पिता उसे बेहद गंभीर हालत में 29 जून को इलाज के लिए स्वामी दयानंद अस्पताल लेकर पहुंचे थे। बच्ची की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे करीब 40 दिनों तक वेंटिलेटर और आईसीयू सपोर्ट पर रखा गया। इसके बाद बच्ची को लगभग 43 दिनों तक हाई डिपेंडेंसी यूनिट (HDU) में रखा गया। इस तरह वह करीब 83 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रही। इस दौरान अस्पताल के बाल रोग विभाग समेत कई डॉक्टरों ने उसकी लगातार निगरानी और इलाज किया। लंबे उपचार के बाद बच्ची की हालत में सुधार हुआ और उसका सफलतापूर्वक इलाज किया गया।
डॉक्टरों के मुताबिक, बच्ची में बीमारी के कारण काफी अधिक कमजोरी आ गई थी और उसकी सांस लेने की क्षमता भी प्रभावित हो रही थी। गंभीर स्थिति के बावजूद डॉक्टरों की लगातार निगरानी और उपचार से उसकी हालत में धीरे-धीरे सुधार हुआ। करीब 83 दिनों तक अस्पताल में इलाज के बाद बच्ची को 21 सितंबर, सोमवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉक्टरों ने बताया कि उपचार के दौरान उसकी स्थिति पर लगातार नजर रखी गई।
दिल्ली नगर निगम (MCD) के अस्पतालों में आधुनिक मशीनों और चिकित्सा उपकरणों की सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं। महापौर प्रवेश वाही ने बताया कि निगम के आठ बड़े अस्पतालों का लगातार विस्तार किया जा रहा है और आने वाले दिनों में इससे जुड़ी कई परियोजनाएं शुरू की जाएंगी। उन्होंने बताया कि अगस्त में निगम के सबसे बड़े हिंदू राव अस्पताल में कई आधुनिक मशीनें स्थापित की गई थीं। अब इसी तरह की सुविधाओं का अन्य निगम अस्पतालों में भी विस्तार किया जाएगा।


