– फस्साई ने जारी किया ड्राफ्ट
– दूध से नहीं बने उत्पादों को ‘पनीर’ नाम से बेचने पर प्रस्तावित प्रतिबंध
– 60 दिनों में मांगे सुझाव
नई दिल्ली। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (फस्साई ) ने एनालॉग पनीर यानी दूध के बजाय अन्य सामग्री से तैयार किए जाने वाले पनीर जैसे उत्पादों की लेबलिंग, नामकरण और प्रचार को लेकर नया ड्राफ्ट प्रस्ताव जारी किया है। प्रस्ताव में ऐसे उत्पादों को केवल ‘पनीर’ नाम से बेचने या प्रचारित करने पर रोक लगाने की बात कही गई है।
प्रस्तावित नियमों का उद्देश्य उपभोक्ताओं को खाद्य उत्पाद की वास्तविक प्रकृति की स्पष्ट जानकारी उपलब्ध कराना है। यदि यह प्रावधान अंतिम रूप से लागू होता है, तो ऐसे उत्पाद बनाने और बेचने वाली कंपनियों को अपनी पैकेजिंग, लेबल और मार्केटिंग सामग्री में बदलाव करना पड़ सकता है।
फस्साई ने ड्राफ्ट पर संबंधित पक्षों और आम लोगों से 60 दिनों के भीतर सुझाव और आपत्तियां मांगी हैं। इस अवधि में प्राप्त प्रतिक्रियाओं पर विचार करने के बाद अंतिम नियमों को लेकर निर्णय लिया जाएगा।
एनालॉग पनीर ऐसे उत्पादों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला शब्द है, जो पारंपरिक डेयरी पनीर के समान दिखाई या इस्तेमाल किए जा सकते हैं, लेकिन उनकी संरचना में दूध के स्थान पर या उसके साथ अन्य सामग्री का इस्तेमाल हो सकता है।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ऐसे उत्पादों को इस तरह प्रस्तुत करने पर जोर होगा कि ग्राहक उन्हें पारंपरिक दूध से बने पनीर के रूप में भ्रमित न समझे।
यदि ड्राफ्ट अंतिम नियम के रूप में लागू होता है, तो डेयरी और खाद्य उद्योग से जुड़े कई कारोबारियों को अपने उत्पादों के नाम, पैकेजिंग, लेबलिंग और विज्ञापन सामग्री की समीक्षा करनी होगी। हालांकि, फिलहाल यह प्रस्तावित ड्राफ्ट है और अंतिम नियम लागू होने से पहले इसमें बदलाव संभव है।
फस्साई की ओर से मांगे गए सुझावों की अवधि पूरी होने के बाद इस संबंध में अंतिम फैसला लिया जाएगा।


