न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र महासभा के 81वें सत्र में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर बेहद कड़ा बयान दिया। 22 सितंबर 2026 को महासभा को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनके सामने ईरान के साथ समझौता करने या इस्लामिक रिपब्लिक को “तबाह” करने का विकल्प है। उन्होंने कहा कि यदि समझौता नहीं होता तो अमेरिका ईरान को तेजी से खत्म करने की कार्रवाई कर सकता है।
ट्रंप ने अपने संबोधन में कहा कि ईरान के साथ एक ऐसा समझौता हो सकता है, जिससे वह दोबारा निर्माण कर सके और क्षेत्र में एक बड़ी ताकत बन सके। वहीं, उन्होंने दूसरी स्थिति में ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई की चेतावनी दी। ट्रंप के बयान के अनुसार, उनका एक प्रमुख मुद्दा यह है कि ईरान परमाणु हथियार हासिल न कर सके।
ट्रंप की धमकी के बीच अमेरिका और ईरान के अधिकारियों के बीच न्यूयॉर्क में बातचीत होने की भी जानकारी सामने आई है। ट्रंप ने इन संपर्कों को सकारात्मक बताया, जिससे एक ओर कड़े सैन्य बयान और दूसरी ओर कूटनीतिक बातचीत,दोनों समानांतर दिखाई दिए।
इससे पहले संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने महासभा के उद्घाटन सत्र को संबोधित किया। यह महासचिव के रूप में उनका आखिरी महासभा संबोधन था। उन्होंने कहा कि दुनिया में विभाजन बढ़ रहे हैं और महाशक्तियों को यह समझना होगा कि उनकी ताकत की भी सीमाएं हैं। गुटेरेस ने स्पष्ट कहा कि सिर्फ सैन्य ताकत से शांति सुनिश्चित नहीं की जा सकती और आर्थिक या तकनीकी ताकत भी अकेले स्थिरता की गारंटी नहीं देती।
गुटेरेस ने दुनिया से युद्धों को रोकने, अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान करने और संवाद व सहयोग को मजबूत करने की अपील की। उन्होंने कहा कि मौजूदा वैश्विक संकटों का समाधान शक्ति के इस्तेमाल से नहीं, बल्कि नियमों और बहुपक्षीय सहयोग के जरिए तलाशना होगा।


