मुंबई: महाराष्ट्र (Maharashtra) में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर बनाए गए सात सदस्यीय समिति को लेकर एक बड़ा ही चौंकाने वाला खबर आया है। समिति के सदस्य और बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) के सेवानिवृत्त न्यायाधीश जस्टिस आरसी चव्हाण ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे से नया बवाल खड़ा हो गया है। सुप्रीम कोर्ट की रिटायर्ड जज जस्टिस रंजना देसाई इस 7-सदस्यीय पैनल की अध्यक्षता कर रही हैं।
UCC को लेकर बनाए गए सात सदस्यीय समिति के सदस्य और बॉम्बे हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज जस्टिस आरसी चव्हाण ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। जस्टिस चव्हाण ने 19 सितंबर को समिति की ऑनलाइन बैठक के कुछ घंटे बाद अपना इस्तीफा भेजा था। सूत्रों के अनुसार रिटायर्ड जज जस्टिस आरसी चव्हाण ने UCC पर जनता से राय लेने की प्रक्रिया और समिति की बैठक में एक गैर-सदस्य की कथित मौजूदगी को लेकर सवाल उठाए हैं।
जस्टिस चव्हाण के समिति को भेजे गए ईमेल के मुताबिक बैठक में कुछ सदस्यों ने सुझाव दिया कि जवाब जनता से सुझाव और राय लेने के लिए तैयार किए जाने वाले प्रश्नों के जवाब केवल ‘हां’ या ‘नहीं’ के रूप में लिए जाएं। राज्य में UCC को लागू करने के लिए नियम और सिफारिशें तैयार करने के लिए समिति का गठन किया गया था। आरसी चव्हाण का यह इस्तीफा समिति की दूसरी बैठक के दो दिन बाद आया है। सबसे बड़ा ताज्जुब की यह बात है कि उनके इस्तीफा भेजने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने 21 सितंबर को झट से उनका इस्तीफा भी स्वीकार कर लिया।
इसी महीने सात सितंबर को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महाराष्ट्र विधानसभा में राज्य में UCC नियम बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जस्टिस रंजना देसाई की अध्यक्षता में एक समिति बनाने की घोषणा की थी। बीते दिनों गृह मंत्री अमित शाह ने महाराष्ट्र में ही सीएम देवेंद्र फडणवीस और डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की मौजूदगी में कहा था कि साल 2029 में से पहले सभी एनडीए शासित राज्यों में यूसीसी लागू किया जाएगा।


