लखनऊ। गोमतीनगर क्षेत्र में करीब 15 वर्ष पुराने चोरी के एक मामले में बरामद माल न्यायालय के समक्ष पेश न किए जाने पर कोर्ट ने पुलिस की कार्यप्रणाली पर गंभीर नाराजगी जताई है। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने गोमतीनगर इंस्पेक्टर से जवाब तलब किया है।
कोर्ट ने मालखाने का प्रभार संबंधित मालखाना मोहर्रिर को न दिए जाने को गंभीर प्रशासनिक खामी माना। न्यायालय की टिप्पणी के मुताबिक पुलिस की कार्यप्रणाली पर प्रभावी प्रशासनिक नियंत्रण का अभाव दिखाई देता है। मालखाने के प्रभार की व्यवस्था ठीक न होने का सीधा असर पुराने मुकदमे की न्यायिक प्रक्रिया पर पड़ा।
मामले में पुलिस द्वारा बरामद किए गए माल को न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत नहीं किया जा सका। इस पर कोर्ट ने पुलिस से यह स्पष्ट करने को कहा है कि बरामद माल कहां और किस स्थिति में रखा गया तथा उसे न्यायालय में पेश क्यों नहीं किया गया।
न्यायालय ने माना कि मालखाने के संचालन और प्रभार की व्यवस्था में लापरवाही किसी मुकदमे की पूरी कार्यवाही को प्रभावित कर सकती है। खासकर पुराने मामलों में रिकॉर्ड और बरामदगी से जुड़े सामान की सुरक्षित अभिरक्षा बेहद महत्वपूर्ण है।
कोर्ट ने मामले को केवल एक मुकदमे तक सीमित न रखते हुए डीसीपी पूर्वी से ऐसे अन्य मामलों की आख्या भी मांगी है, जो मालखाने के प्रभार या बरामद माल की उचित अभिरक्षा के अभाव में प्रभावित हुए हों।


