– कोर्ट के आदेश के बावजूद मध्यस्थता शुरू न करने का मामला
– अगली सुनवाई 1 अक्टूबर को
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के प्रमुख सचिव रणवीर प्रसाद के खिलाफ अदालत की अवमानना की कार्यवाही शुरू करने का आदेश दिया है। मामला हाईकोर्ट की एक समन्वय पीठ द्वारा मध्यस्थता शुरू कराने और उसे निर्धारित अवधि में पूरा करने के आदेश के अनुपालन से जुड़ा है।
न्यायमूर्ति जे.जे. मुनीर और न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की पीठ ने कहा कि संबंधित अधिकारी को पूर्व में दिए गए आदेश की जानकारी थी, जिसमें मध्यस्थता शुरू कर उसे चार महीने के भीतर पूरा करने का निर्देश दिया गया था। इसके बावजूद सरकारी आदेशों की शर्तों का पालन न होने का हवाला देते हुए मध्यस्थता को स्वीकार्य नहीं बताया गया।
मामला धान की आपूर्ति की मात्रा, होल्डिंग चार्ज तथा वैधानिक और संविदात्मक बकाया से जुड़े विवाद से संबंधित है। कोर्ट की समन्वय पीठ ने 8 जनवरी 2026 को पक्षकारों के दावों का निपटारा मध्यस्थ के माध्यम से कराने का निर्देश दिया था और मध्यस्थ को चार महीने के भीतर दावे पर निर्णय लेने को कहा था।
इसके बाद खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की ओर से कहा गया कि संबंधित सरकारी आदेशों के तहत निर्धारित जमा राशि नहीं किए जाने के कारण मामले को मध्यस्थता के लिए नहीं भेजा जा सकता। हाईकोर्ट ने प्रथम दृष्टया इसे अपने पूर्व न्यायिक आदेश को निष्प्रभावी करने वाला कदम माना।


