फर्रुखाबाद। आलू की लगातार गिरती कीमतों और पिछले दो वर्षों से हो रहे नुकसान से परेशान किसानों को राहत दिलाने के लिए कृषि विभाग ने फसल चक्र में बदलाव की पहल शुरू की है। विभाग की ओर से किसानों को रबी सीजन में आलू की जगह मक्का की खेती करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। विभाग का मानना है कि इससे किसानों को आर्थिक नुकसान से बचने के साथ प्रति बीघा करीब 10 हजार रुपये तक का लाभ मिल सकता है।
आलू की मंदी ने जिले के किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। पिछले दो वर्षों से अपेक्षित भाव नहीं मिलने के कारण किसानों को उत्पादन लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। छोटे और सीमांत किसान सबसे अधिक प्रभावित हैं और कई किसान कर्ज चुकाने को लेकर भी दबाव में हैं। सरकार की ओर से आलू भंडारण पर 100 रुपये प्रति क्विंटल अनुदान की घोषणा के बावजूद किसानों को बाजार में उचित भाव मिलने की चुनौती बनी हुई है।
कृषि विभाग के आंकलन के अनुसार आलू की खेती में करीब 10 हजार रुपये प्रति बीघा लागत आती है। औसतन 25 क्विंटल प्रति बीघा उत्पादन होने पर करीब 400 रुपये प्रति क्विंटल का भाव मिलता है। भंडारण, परिवहन और अन्य खर्च जोड़ने के बाद किसानों को करीब 7,500 रुपये प्रति बीघा तक नुकसान उठाना पड़ रहा है।
इसके मुकाबले सर्दी के मौसम में मक्का की खेती की लागत करीब 1,500 से 2,000 रुपये प्रति बीघा बताई जा रही है। इससे करीब 12 हजार रुपये प्रति बीघा तक उत्पादन प्राप्त होने की उम्मीद है। विभाग किसानों को मक्का की खेती के फायदे बताते हुए फसल चक्र में बदलाव के लिए प्रेरित कर रहा है, ताकि लगातार आलू की खेती से होने वाले आर्थिक जोखिम को कम किया जा सके।
कृषि विभाग का कहना है कि फसल चक्र बदलने से किसानों को आर्थिक लाभ मिलने के साथ खेत की मिट्टी की उर्वरा शक्ति बनाए रखने में भी मदद मिल सकती है। विभाग की पहल का उद्देश्य किसानों को एक ही फसल पर निर्भरता से बाहर निकालकर वैकल्पिक फसलों की ओर बढ़ाना है।


