पोस्टरों में अतीक, आजम और मुख्तार की तस्वीरें; सपा ने भाजपा पर लगाया आरोप, भाजपा ने पोस्टर लगवाने से किया इनकार
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले सियासी गतिविधियां तेज होती नजर आ रही हैं। सोमवार को लखनऊ, गाजीपुर, मुरादाबाद, गोंडा, अयोध्या समेत करीब 10 शहरों में सपा प्रमुख अखिलेश यादव के खिलाफ पोस्टर लगाए जाने की जानकारी सामने आई। पोस्टरों में अखिलेश यादव के साथ पूर्व सांसद अतीक अहमद, आजम खान, मुख्तार अंसारी और रमाकांत यादव की तस्वीरें लगाई गई थीं।
पोस्टरों पर ‘आजम, अतीक और मुख्तार, यही चलाते थे सरकार’, ‘माफिया राज और अखिलेश, लूट लिया था पूरा प्रदेश’ और ‘माफिया के अखिलेश, अखिलेश के माफिया’ जैसे नारे लिखे गए थे। हालांकि, इन पोस्टरों को किसने लगवाया, इसकी तत्काल पुष्टि नहीं हो सकी। कई स्थानों पर जानकारी मिलते ही सपा कार्यकर्ताओं ने पोस्टर और होर्डिंग्स हटाने शुरू कर दिए।
मुरादाबाद में सपा कार्यकर्ताओं ने यूनिपोल पर चढ़कर पोस्टर फाड़े, जबकि गोंडा और गाजीपुर में भी कार्यकर्ताओं ने पोस्टर हटाकर विरोध जताया। सपा नेताओं ने आरोप लगाया कि इन पोस्टरों के पीछे भाजपा का हाथ है। गाजीपुर के सपा जिलाध्यक्ष गोपाल यादव ने कहा कि प्रशासन ने पोस्टर लगवाने वालों के खिलाफ कार्रवाई नहीं की तो पार्टी सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करेगी। भाजपा ने इन आरोपों से इनकार किया है।
मामले को लेकर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने सपा पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली सपा सरकार में माफियाओं का प्रभाव था और भाजपा सरकार ने गुंडों तथा माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई की है। पाठक ने दावा किया कि सपा की सरकार बनने पर जेल में बंद अपराधियों को बाहर लाकर फिर से कानून-व्यवस्था प्रभावित करने का काम किया जा सकता है।
अयोध्या और जालौन में भी अखिलेश यादव के खिलाफ पोस्टर लगाए जाने की जानकारी सामने आई। अयोध्या में पुलिस ने रात में ही पोस्टर हटवा दिए, जबकि जालौन के उरई में जानकारी मिलते ही सपा कार्यकर्ताओं ने पोस्टर उतार दिए। पोस्टर लगाए जाने और उन्हें हटाए जाने को लेकर स्थानीय स्तर पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
विधानसभा चुनाव से पहले सामने आए इस पोस्टर विवाद ने प्रदेश की सियासत में आरोप-प्रत्यारोप को और तेज कर दिया है। सपा जहां पोस्टर लगाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रही है, वहीं भाजपा ने पोस्टर लगवाने के आरोपों से दूरी बनाई है।


