– बाराबंकी-बहराइच छह लेन परियोजना का काम जारी रहेगा
– लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे में निर्माण गुणवत्ता को लेकर कार्रवाई के बाद बढ़ी निगाहें
लखनऊ। लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे के निर्माण में सामने आई खामियों के बाद राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने पीएनसी इंफ्राटेक पर तीन वर्ष का प्रतिबंध लगाया है। प्रतिबंध के दौरान कंपनी नई एनएचएआई परियोजनाओं की निविदाओं में हिस्सा नहीं ले सकेगी। हालांकि, पहले से स्वीकृत और चल रही परियोजनाओं पर इसका असर नहीं पड़ेगा।
इसी व्यवस्था के तहत बाराबंकी-बहराइच छह लेन परियोजना का काम पीएनसी के जिम्मे जारी रहेगा। एनएचएआई अधिकारियों के अनुसार जिन परियोजनाओं की निविदा पहले ही स्वीकृत हो चुकी है अथवा जिनमें कंपनी पहले ही चयनित हो चुकी है, उन पर प्रतिबंध लागू नहीं होगा।
लखनऊ-कानपुर एक्सप्रेसवे का लोकार्पण जुलाई 2026 में हुआ था। इसके बाद सड़क धंसने, सतह खराब होने और अन्य निर्माण संबंधी समस्याएं सामने आईं। एनएचएआई की कार्रवाई के बाद पीएनसी इंफ्राटेक और उसकी संबंधित कंपनी पर तीन वर्ष का प्रतिबंध लगाया गया है।
एनएचएआई ने एक्सप्रेसवे की मरम्मत और सुधारात्मक कार्यों को लेकर भी कंपनी पर जिम्मेदारी तय की है। रिपोर्ट के अनुसार, कंपनी के पीछे हटने की स्थिति में 30 करोड़ रुपये की प्रदर्शन सुरक्षा राशि जब्त किए जाने की चेतावनी भी दी गई है।
बाराबंकी-बहराइच मार्ग से जुड़ी परियोजना पहले से पीएनसी को आवंटित है, इसलिए मौजूदा प्रतिबंध के बावजूद इसका काम जारी रहेगा। केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में बाराबंकी से बहराइच तक 101.515 किलोमीटर लंबे चार लेन नियंत्रित राजमार्ग के निर्माण को मंजूरी दी थी। परियोजना की स्वीकृत लागत 6,969.04 करोड़ रुपये बताई गई थी।
एक तरफ निर्माण गुणवत्ता को लेकर कंपनी पर कड़ी कार्रवाई की गई है, वहीं दूसरी तरफ पहले से स्वीकृत परियोजना में उसी कंपनी को काम जारी रखने की अनुमति मिलने से परियोजना की गुणवत्ता, निगरानी और जवाबदेही को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि, यह कहना कि बाराबंकी-बहराइच परियोजना में भ्रष्टाचार हुआ है, उपलब्ध स्रोतों से प्रमाणित नहीं है।


