नई दिल्ली। यमन के हूती विद्रोहियों की ओर से सऊदी अरब पर मिसाइल और ड्रोन हमलों के बाद मंगलवार को मक्का में पहली बार इमरजेंसी अलर्ट जारी किया गया। सऊदी सिविल डिफेंस के मुताबिक नेशनल अर्ली वार्निंग प्लेटफॉर्म के जरिए लोगों को खतरे की सूचना दी गई और ऊंची इमारतों, खिड़कियों, बालकनी तथा खुले इलाकों से दूर रहने की सलाह दी गई। कुछ देर बाद खतरा टलने की जानकारी देकर अलर्ट वापस ले लिया गया।
मक्का के साथ जेद्दा और ताइफ में भी मंगलवार सुबह इमरजेंसी अलर्ट जारी किए गए थे। अधिकारियों ने लोगों से शांत रहने, भीड़ से दूर रहने और किसी भी घटना की तस्वीर या वीडियो नहीं बनाने की अपील की। घर से बाहर मौजूद लोगों को नजदीकी सुरक्षित इमारत में जाने या मजबूत जगह की आड़ लेने की सलाह दी गई।
मक्का की ओर मिसाइल पहुंचने का यह पहला मामला नहीं है। 27 जुलाई 2017 को भी हूती विद्रोहियों ने मक्का की दिशा में बैलिस्टिक मिसाइल दागी थी। सऊदी अधिकारियों के अनुसार मिसाइल को मक्का से करीब 69 किलोमीटर दूर अल-वसिलिया इलाके में ही नष्ट कर दिया गया था। मौजूदा घटनाक्रम में भी सऊदी एयर डिफेंस को कई हवाई खतरों से निपटना पड़ा है।
हूती हमलों के बीच सऊदी अरब में पिछले दिनों तनाव लगातार बढ़ा है। सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन के प्रवक्ता कर्नल तुर्की अल-मलिकी के मुताबिक सोमवार के हमलों में कम से कम 13 नागरिक घायल हुए। इससे पहले हुए हमलों में भी दर्जनों लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है। अब मक्का जैसे सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक केंद्र में सुरक्षा अलर्ट ने चिंता और बढ़ा दी है।
मक्का में हर साल करोड़ों श्रद्धालु हज और उमरा के लिए पहुंचते हैं। ऐसे में यहां हवाई हमले का खतरा बेहद संवेदनशील माना जाता है। सऊदी अरब ने मक्का की सुरक्षा के लिए एयर डिफेंस, रडार निगरानी, मोबाइल इमरजेंसी अलर्ट और पुलिस-सिविल डिफेंस का बहुस्तरीय सुरक्षा तंत्र तैयार किया है।
यमन में हूती विद्रोहियों और सरकार समर्थित बलों के बीच संघर्ष तेज होने के साथ सऊदी अरब पर हमले भी बढ़े हैं। इसी बीच लाल सागर के तटीय इलाकों में हूतियों के बढ़ते प्रभाव ने सऊदी की सुरक्षा और व्यापारिक मार्गों को लेकर चिंता बढ़ा दी है। सऊदी अरब की ओर से सहयोगी देशों से मदद मांगे जाने की खबरों के बीच पाकिस्तान ने किसी दूसरे देश की जमीन पर युद्ध में अपनी सेना भेजने से इनकार किया


