फर्रुखाबाद। गंगा और रामगंगा के जलस्तर में गिरावट से मंगलवार को जिले में बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों को कुछ राहत मिली। मंगलवार सुबह आठ बजे लोहिया सेतु पांचाल घाट पर गंगा का जलस्तर 136.85 मीटर गेज दर्ज किया गया। वहीं ब्रह्मदेव द्विवेदी सेतु पर रामगंगा का जलस्तर भी 136.85 मीटर गेज रहा। नदियों का पानी घटने से बाढ़ प्रभावित गांवों में राहत की उम्मीद बढ़ी है।
राजेपुर क्षेत्र के चित्रकूट डिप से बाढ़ का पानी उतरने के बाद फर्रुखाबाद-बदायूं स्टेट हाईवे पर आवागमन फिर शुरू हो गया है। लंबे समय से रास्ता बंद रहने के कारण परेशान ग्रामीणों और वाहन चालकों को इससे बड़ी राहत मिली है। हालांकि कई गांवों के संपर्क मार्गों पर अभी भी पानी भरा होने से आवागमन पूरी तरह सामान्य नहीं हो सका है।
गंगा की बाढ़ का पानी कई गांवों में करीब डेढ़ महीने से जमा रहा है। जलस्तर घटने के बाद खेतों और गांवों में भरा पानी धीरे-धीरे निकलने लगा है, लेकिन ग्रामीणों की परेशानियां अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुई हैं। कई प्रभावित परिवारों के घरों में पानी भरा होने के कारण उन्हें खुले स्थानों पर रहने को मजबूर होना पड़ रहा है। पशुओं के चारे का संकट भी बना हुआ है।
पानी घटने के साथ बाढ़ प्रभावित इलाकों में नावों का संचालन भी कम होने लगा है। इससे उन गांवों के ग्रामीणों के सामने आवागमन की चुनौती खड़ी हो सकती है, जहां सड़क संपर्क अभी बहाल नहीं हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि नदियों का जलस्तर इसी तरह घटता रहा और बांधों से अधिक पानी नहीं छोड़ा गया तो जल्द ही जनजीवन सामान्य होने की उम्मीद है।
प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में निगरानी जारी है। फिलहाल गंगा और रामगंगा के जलस्तर में आई कमी को राहत के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि प्रभावित गांवों में हालात पूरी तरह सामान्य होने में अभी समय लग सकता है।


