जयपुर। राजस्थान के 309 नगरीय निकायों के चुनाव नतीजों में भाजपा ने शुरुआती पिछड़ने के बाद जोरदार वापसी करते हुए बढ़त बना ली है। 41 जिलों के वार्डवार नतीजों में भाजपा 28 जिलों में सबसे ज्यादा वार्ड जीतकर आगे रही, जबकि कांग्रेस 13 जिलों में बढ़त बनाने में सफल रही। हालांकि, कई शहरों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने दोनों प्रमुख दलों का गणित बिगाड़ दिया है।
राज्य में 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद और 252 नगरपालिकाओं के लिए हुए चुनाव में बड़े शहरों के नतीजे भी मिश्रित रहे। जयपुर, कोटा, उदयपुर, अजमेर और भीलवाड़ा जैसे प्रमुख शहरी क्षेत्रों में भाजपा ने कांग्रेस के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन किया। वहीं जोधपुर और बीकानेर में भी भाजपा ने कांग्रेस पर बढ़त बनाई। दूसरी ओर शेखावाटी क्षेत्र के सीकर और झुंझुनूं में कांग्रेस का प्रदर्शन मजबूत रहा।
छोटे दलों ने भी कई जगह चौंकाने वाले परिणाम दिए। बारां नगर परिषद में आम आदमी पार्टी ने 60 में से 31 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया। यहां कांग्रेस को 18 और भाजपा को महज नौ सीटें मिलीं। बीकानेर की नोखा नगरपालिका में माकपा ने 45 में से 29 वार्ड जीतकर एकतरफा बढ़त बनाई, जबकि भाजपा को 13 सीटें मिलीं और कांग्रेस का खाता तक नहीं खुल सका। राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी ने भी राज्यभर में 62 वार्डों पर जीत दर्ज की।
बसपा ने 19 और भारत आदिवासी पार्टी ने आठ वार्डों में जीत दर्ज की। सबसे बड़ा असर निर्दलीयों का रहा, जिन्होंने राज्यभर में 2,243 वार्डों पर जीत दर्ज कर कई निकायों में सत्ता की चाबी अपने हाथ में रखी। भरतपुर नगर निगम, नदबई, डीग और मकराना समेत कई निकायों में निर्दलीय भाजपा-कांग्रेस दोनों से आगे निकल गए।
अजमेर में कांग्रेस 37 वार्ड जीतकर भाजपा के 32 और निर्दलीयों के 11 वार्डों से आगे रही, लेकिन बोर्ड बनाने के लिए उसे निर्दलीयों का सहारा लेना पड़ सकता है। भरतपुर में 65 में से 36 वार्ड निर्दलीयों के खाते में गए। वहीं झालावाड़ में कांग्रेस ने 25 में से 18 वार्ड जीतकर पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के प्रभाव वाले क्षेत्र में भाजपा को बड़ा झटका दिया। कुल मिलाकर नतीजों ने साफ कर दिया कि राजस्थान के शहरी निकायों में भाजपा बढ़त में जरूर है, लेकिन कई जगह बोर्ड गठन के लिए निर्दलीयों और छोटे दलों की भूमिका निर्णायक रहने वाली है।


