रामनगर। कभी दिवली गांव पहुंचने के लिए लोग हाइवे से उतरकर महज डेढ़ सौ मीटर पैदल चलकर रेलवे क्रासिंग पार कर सीधे गांव पहुंच जाते थे। दिन हो या रात क्रासिंग खुली होने पर लोग बिना किसी डर के आवागमन कर लेते थे। अब रेलवे ने क्रासिंग हटाकर अंडरपास तो बना दिया लेकिन ग्रामीणों की मुश्किलें कम होने के बजाय बढ़ गई हैं।अंडरपास में पानी भरा है और शाम छह बजे के बाद धुप्प अंधेरा छा जाता है।
रेल विभाग ने यहां अब तक पर्याप्त प्रकाश की व्यवस्था नहीं की है। ऐसे में बाराबंकी, गोंडा सहित दूर-दराज से आने वाले रिश्तेदार जब हाइवे पर उतरकर दिवली गांव की ओर पैदल बढ़ते हैं तो अंधेरे और पानी से भरे अंडरपास को देखकर आगे जाने से डरते हैं।
सबसे बड़ी परेशानी रात में होती है। अंडरपास में न रोशनी है न पानी निकासी की समुचित व्यवस्था। अंधेरे में पानी के बीच से निकलना दुर्घटना का खतरा पैदा करता है। मजबूर होकर ग्रामीणों और गांव आने वाले लोगों को करीब दस बारह किलोमीटर घूमकर गांव पहुंचना पड़ रहा है और लोग रेलवे को कोसते रहते ।
ग्रामीणों का कहना है कि क्रासिंग हटाकर अंडरपास बनाने का उद्देश्य आवागमन आसान करना था लेकिन बिना रोशनी और जलनिकासी के यह सुविधा के बजाय परेशानी बन गया है। रेल विभाग की अनदेखी से रात में दिवली पहुंचना खासकर पैदल आने-जाने वालों के लिए जोखिम भरा हो गया है। महिलाओं को तो और दिक्कते होती हैं।ग्रामीणों ने अंडरपास में तत्काल प्रकाश व्यवस्था और पानी निकासी कराने की मांग की है।।


