लखनऊ। नेशनल पोस्ट ग्रेजुएट
कॉलेज के हिंदी विभाग की ओर से सोमवार को ‘वर्तमान युवापीढ़ी जेन-जी के बौद्धिक विकास में हिंदी की भूमिका’ विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। कॉलेज सभागार में आयोजित कार्यक्रम में लखनऊ विश्वविद्यालय की आचार्य प्रो. अलका पाण्डेय ने मुख्य वक्ता के रूप में अपने विचार रखे।
प्रो. अलका पाण्डेय ने कहा कि हिंदी साहित्य में ज्ञान का अतुलित भंडार मौजूद है। आज की युवा पीढ़ी को हिंदी साहित्य में निहित भारतीय ज्ञान परंपरा से परिचित कराना बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा कि कबीर, सूरदास, तुलसीदास, प्रेमचंद, जयशंकर प्रसाद और सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जैसे रचनाकारों की कृतियां और उनके विचार जेन-जी के बौद्धिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
कार्यक्रम के प्रारंभ में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. देवेंद्र कुमार सिंह ने मुख्य वक्ता का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा और साहित्य में मौजूद श्रेष्ठ विचारों एवं मूल्यों के माध्यम से युवा पीढ़ी को नई दिशा दी जा सकती है। वर्तमान दौर में युवाओं को अपनी भाषा, साहित्य और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
इस अवसर पर ‘हिंदी वर्तमान युवापीढ़ी जेन-जी के बौद्धिक विकास में सशक्त भूमिका निभा रही है’ विषय पर आयोजित वाद-विवाद प्रतियोगिता के प्रथम, द्वितीय और तृतीय स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया गया। प्रतियोगिता में शामिल सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए गए।
संगोष्ठी में महाविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी, छात्र-छात्राएं, पत्रकार, छायाकार और अन्य विशिष्ट जन मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में हिंदी विभाग के अध्यक्ष प्रो. रामकृष्ण ने मुख्य वक्ता और सभी अतिथियों के प्रति आभार व्यक्त किया।


