मुंबई: केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी (Nitin Gadkari) शनिवार को मुंबई (Mumbai) के भारी ट्रैफिक जाम में फंस गए। वर्ली से कार्यक्रम स्थल तक पहुंचने में उन्हें करीब एक घंटे की देरी हुई। हालांकि, ट्रैफिक व्यवस्था पर नाराजगी जताने के बजाय गडकरी ने मजाकिया अंदाज में कहा कि मौजूदा स्थिति के लिए वह खुद भी जिम्मेदार हैं। उनकी इस टिप्पणी पर कार्यक्रम में मौजूद लोग हंस पड़े।
मुंबई में आयोजित ‘इंडो-अमेरिकन कॉर्पोरेट एक्सीलेंस अवार्ड्स’ में गडकरी ने कहा कि महाराष्ट्र के लोक निर्माण मंत्री रहते हुए 1995 से 2000 के बीच उन्हें मुंबई में 55 फ्लाईओवर, बांद्रा-वर्ली सी लिंक और मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे के निर्माण का अवसर मिला था। उन्होंने कहा, “आज कार्यक्रम में पहुंचने में मुझे एक घंटे की देरी हुई, क्योंकि वर्ली से निकलने के बाद मैं ट्रैफिक में फंस गया। सच कहूं तो मैं अपनी ही गलती की कीमत चुका रहा हूं। उस समय जो तकनीक उपलब्ध थी, उसी के आधार पर ये प्रोजेक्ट बनाए गए थे।”
गडकरी ने कहा कि पिछले कुछ दशकों में मुंबई में वाहनों की संख्या तेजी से बढ़ी है। ऐसे में पुरानी तकनीक और डिजाइन पर आधारित फ्लाईओवर अब बढ़ते ट्रैफिक के लिए पर्याप्त नहीं हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पुराने फ्लाईओवरों को आधुनिक तकनीक से बदलने की सलाह देने की बात कही।
पुणे के लिए ₹50,000 करोड़ की मल्टी-लेवल योजना
गडकरी ने बताया कि पुणे के ट्रैफिक समाधान के लिए करीब ₹50,000 करोड़ के इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट का प्रस्ताव है। इसके तहत मलेशिया से ऐसी तकनीक लाई गई है, जिससे एक ही पिलर सेट पर मल्टी-लेवल फ्लाईओवर बनाए जा सकेंगे।
उन्होंने भारत-अमेरिका सहयोग को भी महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि भारत की क्षमता और अमेरिका के संसाधनों व अत्याधुनिक तकनीक का मेल दुनिया के लिए ‘विन-विन’ स्थिति पैदा कर सकता है। गडकरी ने यह भी कहा कि भारत जापान को पीछे छोड़कर दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार बन चुका है। अब भारत से आगे केवल अमेरिका और चीन हैं।


