– फुलब्राइट स्कॉलर-इन-रेजिडेंस के लिए डॉ. कमलेश कुमार दुबे आमंत्रित
– एआई से लेकर क्वांटम क्रिप्टोग्राफी तक पढ़ाएंगे
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की फॉरेंसिक और तकनीकी प्रतिभा अब अमेरिका की नई पीढ़ी तक पहुंचेगी। उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस (यूपीएसआईएफएस) के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कमलेश कुमार दुबे को वर्ष 2026-27 के लिए अमेरिका के प्रतिष्ठित फुलब्राइट स्कॉलर-इन-रेजिडेंस कार्यक्रम के तहत आमंत्रित किया गया है। वह नॉर्थ कैरोलिना के सैलिसबरी स्थित लिविंगस्टोन कॉलेज में दो अकादमिक सेमेस्टर तक शैक्षणिक गतिविधियों में भाग लेंगे।
यूपीएसआईएफएस के संस्थापक निदेशक डॉ. जीके गोस्वामी ने बताया कि डॉ. दुबे का चयन उत्तर प्रदेश की अकादमिक और तकनीकी क्षमता को मिली महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय मान्यता है। इससे भारत और अमेरिका के बीच गणित, डेटा विश्लेषण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उभरती तकनीकों के क्षेत्र में शैक्षणिक एवं शोध सहयोग की नई संभावनाएं मजबूत होंगी।
अमेरिका में डॉ. दुबे गणित के साथ भविष्य की तकनीकों से जुड़े विषयों पर विद्यार्थियों को प्रशिक्षण देंगे। इनमें प्रेडिक्टिव एनालिटिक्स, बिजनेस एनालिटिक्स, डिस्क्रिप्टिव एनालिटिक्स और डेटा माइनिंग के साथ कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डेटा विश्लेषण, साइबर सुरक्षा, क्रिप्टोग्राफी, क्वांटम क्रिप्टोग्राफी और ब्लॉकचेन जैसे विषय शामिल हैं।
डॉ. गोस्वामी के मुताबिक गणित को एआई और डेटा की दुनिया से जोड़कर पढ़ाने का डॉ. दुबे का अनुभव दोनों देशों के विद्यार्थियों, शिक्षकों और शोधार्थियों के बीच नए अकादमिक संवाद का आधार बन सकता है। डॉ. गोस्वामी स्वयं फुलब्राइट फ्लेक्स अवार्ड फेलो रह चुके हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में फॉरेंसिक साइंस, साइबर सुरक्षा और आधुनिक तकनीकी क्षमताओं को संस्थागत रूप से मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है। यूपीएसआईएफएस इसी दिशा में प्रदेश में आधुनिक फॉरेंसिक तंत्र विकसित करने की भूमिका निभा रहा है।
बदलते अपराध के दौर में साइबर अपराध, डिजिटल धोखाधड़ी और डेटा आधारित अपराध लगातार चुनौती बन रहे हैं। ऐसे में फॉरेंसिक साइंस को एआई, डेटा विश्लेषण, साइबर सुरक्षा और क्रिप्टोग्राफी जैसी तकनीकों से जोड़ना महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रदेश में विकसित हो रहा फॉरेंसिक तंत्र अब केवल अपराध जांच तक सीमित नहीं है। इसका दायरा साइबर सुरक्षा, डिजिटल फॉरेंसिक, डेटा विश्लेषण और उभरती तकनीकों तक बढ़ाया जा रहा है। यूपीएसआईएफएस में विभिन्न जिलों के अधिकारियों को आधुनिक फॉरेंसिक तकनीकों का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है, ताकि जांच व्यवस्था को वैज्ञानिक, तकनीकी और साक्ष्य आधारित बनाया जा सके।
डॉ. दुबे का अमेरिका जाना इसी व्यापक बदलाव का अंतरराष्ट्रीय विस्तार माना जा रहा है। वह वहां अमेरिकी विद्यार्थियों के साथ अपने ज्ञान और अनुभव साझा करने के साथ उत्तर प्रदेश में विकसित हो रही फॉरेंसिक और तकनीकी क्षमताओं को भी वैश्विक अकादमिक समुदाय के सामने रखने का अवसर पाएंगे।
डॉ. कमलेश कुमार दुबे की यह उपलब्धि उनकी 19 वर्षों से अधिक की अकादमिक यात्रा का परिणाम है। उन्होंने दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय से गणित में पीएचडी तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीएससी और एमएससी की उपाधियां प्राप्त की हैं।
उनके नाम 40 से अधिक शोध-पत्र, 10 पेटेंट और चार पुस्तकें प्रकाशित होने का उल्लेख है। उनके निर्देशन में छह शोधार्थी पीएचडी पूरी कर चुके हैं।
फुलब्राइट स्कॉलर-इन-रेजिडेंस के रूप में डॉ. दुबे का अमेरिका जाना इस बात का संकेत माना जा रहा है कि उत्तर प्रदेश अब केवल तकनीकी प्रतिभा तैयार करने तक सीमित नहीं, बल्कि वैश्विक ज्ञान-विनिमय में भी अपनी भूमिका बढ़ा रहा है। फॉरेंसिक साइंस और आधुनिक तकनीक को प्रदेश की ताकत बनाने की दिशा में किए जा रहे प्रयासों को इस उपलब्धि से अंतरराष्ट्रीय अकादमिक मंच पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है।


