फर्रुखाबाद। जिले में हर साल गंगा की बाढ़ से प्रभावित होने वाले ग्रामीण इलाकों को स्थायी राहत दिलाने की दिशा में प्रशासन ने कवायद शुरू कर दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश के बाद गंगा की जलधारा को व्यवस्थित करने के लिए ड्रेजिंग की योजना तैयार की जा रही है। शुरुआती चरण में नदी के पांच स्थानों को चिह्नित किया गया है, जहां ड्रेजिंग के माध्यम से जलधारा को सीधा और बहाव को बेहतर करने का प्रयास किया जाएगा।
जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर के निर्देश पर कानपुर से सिंचाई विभाग की मैकेनिकल इंजीनियरिंग टीम फर्रुखाबाद पहुंची और ड्रोन के माध्यम से गंगा नदी का सर्वे किया। सर्वे में नदी की मौजूदा जलधारा, बहाव की दिशा और किन स्थानों पर पानी के दबाव की स्थिति बनती है, इसका तकनीकी अध्ययन किया जा रहा है। प्रशासन का मानना है कि वैज्ञानिक तरीके से ड्रेजिंग किए जाने से नदी का बहाव व्यवस्थित करने में मदद मिल सकती है।
पांच स्थानों पर ड्रेजिंग का प्रस्ताव
प्रशासन ने प्रारंभिक सर्वे के आधार पर गंगा में पांच स्थानों को चिह्नित किया है। इन स्थानों पर जरूरत के अनुसार ड्रेजिंग कर नदी की जलधारा को व्यवस्थित करने की योजना है। इसका उद्देश्य पानी के बहाव को सुचारु करना और बाढ़ के दौरान आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों पर पड़ने वाले दबाव को कम करना है। हालांकि, अंतिम रूप से स्थान और काम की प्रकृति ड्रोन सर्वे की रिपोर्ट आने के बाद तय की जाएगी।
आईआईटी विशेषज्ञों से भी लिया जा रहा सुझाव
योजना को प्रभावी बनाने के लिए जिला प्रशासन तकनीकी विशेषज्ञों की राय भी ले रहा है। जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने आईआईटी के प्रोफेसर राजीव सिन्हा और सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता केपी पांडेय के साथ बैठक कर गंगा के बहाव और बाढ़ की समस्या पर चर्चा की। विशेषज्ञों से नदी की प्रकृति और जलधारा को व्यवस्थित करने के संबंध में सुझाव लिए गए हैं। प्रशासन ड्रोन सर्वे की रिपोर्ट और विशेषज्ञों की राय के आधार पर आगे की कार्ययोजना तैयार करेगा।
सर्वे रिपोर्ट के बाद तय होगा काम
जिला प्रशासन के मुताबिक ड्रोन सर्वे से गंगा की जलधारा और बहाव की वास्तविक स्थिति की विस्तृत जानकारी मिल सकेगी। इसके बाद यह तय किया जाएगा कि किन स्थानों पर कितनी ड्रेजिंग की जरूरत है और किस तकनीकी तरीके से काम कराया जाए। प्रशासन की कोशिश है कि बिना नदी के प्राकृतिक प्रवाह को प्रभावित किए वैज्ञानिक तरीके से काम किया जाए। योजना सफल रहती है तो लंबे समय में बाढ़ प्रभावित गांवों को राहत मिलने की उम्मीद है।


