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Sunday, September 13, 2026

समधन अधिशासी अधिकारी दिव्या गुप्ता पर गंभीर आरोप

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80 लाख की संपत्ति से रिश्तेदारों के खातों तक…

कन्नौज । नगर पंचायत समधन की अधिशासी अधिकारी दिव्या गुप्ता को लेकर संपत्तियों की खरीद और आर्थिक लेनदेन के आरोपों ने नगर पंचायत की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि उनके कार्यकाल के दौरान उनकी मां सीमा गुप्ता के नाम जहानगंज-कमालगंज मार्ग पर करीब 80 लाख रुपये बाजार मूल्य की संपत्ति खरीदी गई। इसी मार्ग पर एक अन्य प्लाट तथा कानपुर में पारिवारिक जनों के नाम तीन प्लाट खरीदे जाने की भी चर्चा है। आरोपों के बाद अब इन संपत्तियों की खरीद में इस्तेमाल धन के स्रोत को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
आरोप है कि नगर पंचायत से जुड़े कुछ ठेकेदारों की ओर से अधिशासी अधिकारी के भाई कार्तिकेय गुप्ता के खाते में आरटीजीएस के माध्यम से रकम भेजी गई। इसके अलावा नगर पंचायत के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर दावा किया कि कार्यालय में तैनात कंप्यूटर ऑपरेटर दीपक के खाते से भी कई बार अधिशासी अधिकारी के पारिवारिक जनों के खातों में रकम स्थानांतरित की गई। कर्मचारी का कहना है कि संबंधित खातों की जांच होने पर लेनदेन की वास्तविकता सामने आ सकती है।
मामले में यह आरोप भी लगाया जा रहा है कि अधिशासी अधिकारी के कमालगंज स्थित एक प्लाट पर वर्तमान में निर्माण कार्य चल रहा है और वहां इस्तेमाल की जा रही ईंटें नगर पंचायत अध्यक्ष के परिवार से जुड़े ईंट भट्ठे से लाई गई हैं। वहीं अध्यक्ष के पुत्र अयान सिद्दीकी और अधिशासी अधिकारी के बीच नजदीकियों को लेकर भी स्थानीय स्तर पर चर्चाएं हैं।

उच्चस्तरीय जांच की उठी मांग

गंभीर आरोपों के बीच स्थानीय लोगों ने शासन से पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। लोगों का कहना है कि अधिशासी अधिकारी के साथ-साथ उनके पारिवारिक जनों के बैंक खातों में हुए लेनदेन की भी जांच होनी चाहिए। मांग है कि अब तक खरीदी गई सभी संपत्तियों के दस्तावेज,बाजार मूल्य और धन के स्रोत की जांच कराई जाए।

लोगों ने मांग की है कि शासन स्तर से एक विशेष टीम गठित कर अधिशासी अधिकारी और उनके पारिवारिक जनों की संपत्तियों तथा संबंधित बैंक खातों की गहन जांच कराई जाए। नगर पंचायत से जुड़े ठेकेदारों के भुगतान, आरटीजीएस लेनदेन और कार्यालय से जुड़े अन्य वित्तीय अभिलेखों का भी मिलान कराया जाए, और उनककी पूर्व तैनाती की भी जांच हो ताकि यह स्पष्ट हो सके कि लगाए जा रहे आरोपों में कितनी सच्चाई है।
अब निगाहें शासन की कार्रवाई पर हैं। यदि उच्चस्तरीय टीम गठित कर संपत्तियों और बैंक खातों की जांच कराई जाती है तो आरोपों की वास्तविकता सामने आने के साथ नगर पंचायत में वित्तीय पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों का भी जवाब मिल सकेगा।

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