– तीसरे दिन की कथा सुन भावविभोर हुए श्रोता
गुरसहायगंज, कन्नौज। समुद्र मंथन की कथा सुनाते हुए कहा कि मानव हृदय ही संसार सागर है। मनुष्य के अच्छे और बुरे विचार ही देवता और दानव के द्वारा किया जाने वाला मंथन है। कभी हमारे अंदर अच्छे विचारों का चितन मंथन चलता रहता है और कभी हमारे ही अंदर बुरे विचारों का चितन मंथन चलता रहता। यह प्रसंग कथा के दौरान पंडित प्रेमसागर पांडेय ने सुनाया।
मंगलवार को नगर के संतोषी माता मंदिर प्रांगण में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक प्रेमसागर पांडेय ने भगवान के चौबीस अवतारों की कथा के साथ-साथ समुद्र मंथन की बहुत ही रोचक एवं सारगर्भित कथा सुनाते हुए कहा कि यह संसार भगवान का एक सुंदर बगीचा है। यहां चौरासी लाख योनियों के रूप में भिन्न- भिन्न प्रकार के फूल खिले हुए हैं। जब-जब कोई अपने गलत कर्माे द्वारा इस संसार रूपी भगवान के बगीचे को नुकसान पहुंचाने की चेष्टा करता है तब-तब भगवान इस धरा धाम पर अवतार लेकर सजनों का उद्धार और दुर्जनों का संघार किया करते हैं। बताया कि जिसके अंदर का दानव जीत गया। उसका जीवन दुखी, परेशान और कष्ट कठिनाइयों से भरा होगा और जिसके अंदर का देवता जीत गया। उसका जीवन सुखी, संतुष्ट और भगवत प्रेम से भरा हुआ होगा। इसलिए हमेशा अपने विचारों पर पैनी नजर रखते हुए बुरे विचारों को अच्छे विचारों से जीतते हुए अपने मानव जीवन को सुखमय एवं आनंद मय बनाना चाहिए। कथा के प्रारंभ में श्री भागवत भगवान का पूजन कर आरती उतारी गई। कथा सुनने के लिए आस पास के लोगों की भारी भीड़ उमड़ रही है।
मनुष्य के अच्छे और बुरे विचार ही होते है देवता और दानव


