नई दिल्ली। दिल्ली के सत्य निकेतन में हॉस्टल की चार मंजिला इमारत ढहने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने नगर निगम और दिल्ली विश्वविद्यालय की जवाबदेही तय की है। अदालत ने कहा कि बाहर से पढ़ने आने वाले छात्रों के हॉस्टलों की हालत बेहद खराब है और सरकार अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकती। हाईकोर्ट ने दिल्ली सरकार, केंद्र सरकार, MCD, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली पुलिस और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग को 10 दिन में जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
हादसे में अब तक सात लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 12 लोगों को मलबे से सुरक्षित निकाला गया। घायलों में पांच की हालत गंभीर बताई गई है। रविवार दोपहर करीब 1:30 बजे दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन में इमारत अचानक भरभराकर गिर गई थी। करीब 27 घंटे चले रेस्क्यू अभियान के बाद सोमवार शाम ऑपरेशन पूरा किया गया।
मालिक, पत्नी और बेटा गिरफ्तार
दिल्ली पुलिस ने इमारत के मालिक हरिराम बंसल, उसकी पत्नी उर्मिला और बेटे महेश को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने पहले हरिराम के खिलाफ लुकआउट सर्कुलर जारी किया था। मामले में गैर इरादतन हत्या और लापरवाही की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया गया है।
पांच अधिकारी निलंबित
हादसे के बाद दिल्ली सरकार ने MCD के डिप्टी कमिश्नर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, सुप्रीटेंडेंट इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर को निलंबित कर दिया। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मजिस्ट्रेट जांच के साथ दोषियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। मेयर ने भी अवैध निर्माणों पर कार्रवाई की बात कही है।
तीन साल में 1133 इमारतें गिरीं
सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, वर्ष 2022 से 2025 के बीच दिल्ली में इमारत गिरने की 1133 घटनाएं हुईं, जिनमें 98 लोगों की जान गई। सत्य निकेतन हादसे ने राजधानी में छात्रावासों और पीजी की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। हाईकोर्ट में सभी पीजी और हॉस्टलों का स्ट्रक्चरल ऑडिट कराने तथा मृतकों के परिजनों को मुआवजा देने की मांग भी उठी है।


