पंख लगाकर सपनो के
उडने को थे वो तो बेताब
करनी थी बातें फलक से
छूना था उनको आफताब
मगर कहाँ पता था??
किसको पता था??
सपना चूर चूर हो जायेगा
साया था सर का जो
वो कहर किस कदर ढहायेगा??
दोष था कया इन निर्दोषों का??
कितने घर जाने उजड गये??
लाल कयी मांओं के
जीते जी बिछड गये
टूटे सपने टूटा आशियां
किस किस का जाने लुटा जहाँ??
जिम्मेदार प्रशासन या प्रबंधन?????
कया जवाब?? कोई?? किसके यहाँ??
अनामिका गुप्ता


