– प्रशांत कुमार की पहल बनी जनसेवा को आसान और जवाबदेह बनाने की कोशिश
प्रशांत कटियार
लोकतंत्र में जनता को अपनी समस्या लेकर बार-बार दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें, बल्कि व्यवस्था खुद जनता तक पहुंचे,आज के समय में जनसेवा का इससे बेहतर स्वरूप क्या हो सकता है। बिहार के बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में प्रशांत कुमार की ओर से शुरू की जा रही पीके जनसुविधा केंद्र की डिजिटल व्यवस्था इसी सोच को जमीन पर उतारने की कोशिश है।
15 सितंबर 2026 से प्रस्तावित इस व्यवस्था में नागरिक मोबाइल के माध्यम से घर बैठे अपनी समस्या दर्ज करा सकेंगे। शिकायत दर्ज होने के बाद उसे संबंधित विभाग तक पहुंचाने और समाधान होने तक उसके फॉलोअप की व्यवस्था भी रखी गई है।
यह पहल इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि आम आदमी की सबसे बड़ी परेशानी कई बार समस्या नहीं, बल्कि समस्या को सही जगह तक पहुंचाना और उसके समाधान के लिए लगातार दौड़ना होती है।
गरीब, बुजुर्ग, महिलाएं, दिव्यांग और दूरदराज के इलाकों में रहने वाले लोगों के लिए एक छोटी शिकायत भी कई बार समय और धन दोनों की बड़ी कीमत वसूलती है। ऑनलाइन जनसुविधा व्यवस्था इस परेशानी को कम कर सकती है।
इस मॉडल की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि शिकायत दर्ज होने के बाद उसका रिकॉर्ड कितना व्यवस्थित रहता है, संबंधित विभाग पर कितना प्रभावी फॉलोअप होता है और नागरिक को समाधान की जानकारी कितनी पारदर्शिता से मिलती है।
यदि हर शिकायत को एक नंबर, एक जिम्मेदार विभाग और एक तय समय-सीमा से जोड़ दिया जाए तो जनसेवा में जवाबदेही बढ़ सकती है।
इस व्यवस्था को केवल बांकीपुर तक सीमित रखने के बजाय बिहार के दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में भी अपनाया जा सकता है। सांसद और विधायक अपने-अपने क्षेत्रों में ऐसी डिजिटल जनसुविधा व्यवस्था विकसित करें तो जनता की समस्याओं का रिकॉर्ड भी तैयार होगा और जनप्रतिनिधियों को अपने क्षेत्र की वास्तविक जरूरतों को समझने में भी मदद मिलेगी।
आगे चलकर इसे पंचायत से प्रखंड, प्रखंड से जिला और जिला से संबंधित विभाग तक जोड़ा जा सकता है। तब किसी नागरिक की शिकायत केवल आवेदन बनकर फाइल में नहीं रहेगी, बल्कि उसकी पूरी प्रक्रिया डिजिटल रूप से देखी जा सकेगी।
प्रशांत कुमार की यह पहल एक बड़े विचार की ओर संकेत करती है,जनप्रतिनिधि का काम केवल जनता से मिलना नहीं, बल्कि जनता की समस्या के समाधान तक साथ खड़ा रहना भी है।
राजनीति का मूल्य केवल भाषणों और सभाओं से नहीं, बल्कि इस बात से तय होना चाहिए कि आम नागरिक अपनी समस्या कितनी आसानी से जनप्रतिनिधि तक पहुंचा सकता है और उसे समाधान के लिए कितने चक्कर लगाने पड़ते हैं।
बांकीपुर का यह प्रयोग सफल होता है तो बिहार के लिए यह एक उपयोगी जनसेवा मॉडल बन सकता है।
जनता व्यवस्था के दरवाजे पर क्यों भटके?जब तकनीक मौजूद है तो व्यवस्था जनता के दरवाजे तक क्यों न पहुंचे?
यही आधुनिक जनसेवा की दिशा है और यही लोकतंत्र में जनता को वास्तविक रूप से केंद्र में रखने का रास्ता भी।
लेखक यूथ इंडिया न्यूज़ ग्रुप के स्टेट हेड हैं।


