– सालों से मलाईदार पटल पर जमे बाबुओं की बदली
– कमीशनखोरी पर कसा शिकंजा
– सरकार की नीतियां जन जन तक पहुंचाने की मुहिम
लखनऊ। उत्तर प्रदेश सूचना निदेशालय में वर्षों से एक ही तरह के प्रभावशाली और मलाईदार पटल पर जमे कर्मचारियों की कार्यप्रणाली में बदलाव की कवायद तेज हो गई है। सूचना निदेशक विशाल सिंह के स्तर से विभागीय व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और परिणामोन्मुख बनाने के लिए पटल परिवर्तन की कार्रवाई को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बताया जा रहा है कि लंबे समय से महत्वपूर्ण पटल पर जमे कई प्रभावशाली बाबुओं को वहां से हटाकर अपेक्षाकृत कम सुविधाजनक और अधिक कार्यभार वाले पटल पर जिम्मेदारी दी गई है। इस बदलाव का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि एक ही पटल पर वर्षों तक जमे रहने से बनने वाली कथित सांठगांठ और प्रभाव की व्यवस्था को तोड़ना बताया जा रहा है।
मलाईदार पटल से हटे कर्मचारी, बदली गई जिम्मेदारियां
सूचना निदेशालय में पटल परिवर्तन को लेकर विभागीय स्तर पर चर्चा तेज है। लंबे समय से महत्वपूर्ण कामकाज वाले पटलों पर तैनात कर्मचारियों को दूसरी जिम्मेदारियां दिए जाने से उन व्यवस्थाओं पर भी असर पड़ने की उम्मीद है, जहां काम के बदले अनौपचारिक लेन-देन और कमीशनखोरी की शिकायतें समय-समय पर उठती रही हैं।
हालांकि, किस कर्मचारी ने कितनी धनराशि की कथित कमीशनखोरी की, इसका कोई आधिकारिक आंकड़ा सामने नहीं आया है, इसलिए ऐसे आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही संभव होगी। लेकिन पटल बदलने की कार्रवाई को विभागीय व्यवस्था में जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
सूचना निदेशक विशाल सिंह ने विभागीय कामकाज को केवल कार्यालयी प्रक्रिया तक सीमित रखने के बजाय सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और उपलब्धियों को जनता तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने पर जोर दिया है। सूचना विभाग की मूल जिम्मेदारी ही सरकार और जनता के बीच सूचनाओं का सेतु बनना है।
नई कार्यशैली में सूचना के प्रसार, समाचार सामग्री की गुणवत्ता, सरकारी योजनाओं के प्रचार और जनहितकारी कार्यक्रमों की पहुंच को प्राथमिकता दिए जाने की बात सामने आ रही है। इसका सीधा असर सरकार की योजनाओं से जुड़ी सूचनाओं को जिलों और आम जनता तक पहुंचाने की व्यवस्था पर पड़ रहा है।
विभागीय गलियारों में इस बदलाव को वर्षों से चली आ रही कथित जड़ता को तोड़ने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। किसी भी सरकारी विभाग में एक ही कर्मचारी के लंबे समय तक एक ही संवेदनशील पटल पर रहने से उसके प्रभाव का दायरा बढ़ने की संभावना रहती है। ऐसे में समय-समय पर पटल परिवर्तन को प्रशासनिक पारदर्शिता और संस्थागत संतुलन के लिए जरूरी माना जाता है।
विशाल सिंह के नेतृत्व में चल रही यह कवायद कितनी प्रभावी साबित होती है, इसका असली पैमाना आने वाले दिनों में विभागीय कामकाज की गति, पारदर्शिता और जनसंचार व्यवस्था में दिखाई देने वाला बदलाव होगा। फिलहाल इतना जरूर है कि सूचना निदेशालय में वर्षों से जमी व्यवस्था को हिलाने वाला संदेश साफ है,पद किसी की निजी जागीर नहीं और मलाईदार पटल पर स्थायी कब्जे की गुंजाइश नहीं।


