फर्रुखाबाद। दीवानी न्यायालय कर्मचारी संघ उत्तर प्रदेश के आह्वान पर बुधवार को दीवानी न्यायालय कर्मचारी संघ फर्रुखाबाद की आमसभा आयोजित हुई। इसमें अधीनस्थ न्यायालयों के कर्मचारियों की लंबित समस्याओं और 30 सूत्रीय मांगों पर विस्तार से चर्चा कर प्रदेश संघ के आंदोलन को पूर्ण समर्थन देने का प्रस्ताव पारित किया गया।
संघ के कार्यवाहक अध्यक्ष ऋषि यादव ने कहा कि कर्मचारियों की कई महत्वपूर्ण मांगें लंबे समय से शासन और उच्च न्यायालय स्तर पर लंबित हैं। उन्होंने मांगों के शीघ्र और सकारात्मक निस्तारण की आवश्यकता जताई। प्रमुख मांगों में लिपिकीय वर्ग की भर्ती के लिए शैक्षिक योग्यता स्नातक करने, प्रारंभिक वेतनमान 2800 ग्रेड पे लेवल-5 करने, 4600 ग्रेड पे वाले लिपिकीय कर्मचारियों को राजपत्रित प्रतिष्ठा देने, फास्ट ट्रैक न्यायालयों के संविदा कर्मचारियों के वेतन में 10 प्रतिशत वृद्धि व नियमितीकरण तथा जिला न्यायालय सेवा नियमावली में संशोधन शामिल हैं।
इसके अलावा पदोन्नति की सेवा शर्तों में शिथिलीकरण, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के समाप्त पद का पुनर्सृजन, मकान किराया भत्ता पुनरीक्षित करने, अतिरिक्त टाइपिस्ट व बयान लेखक के पद सृजित करने, संविदा एवं आउटसोर्सिंग व्यवस्था समाप्त करने, समूह ‘ग’ कर्मचारियों को वर्दी व धुलाई भत्ता देने तथा आईसीटी कर्मचारियों के वेतन में वृद्धि और नियमितीकरण की मांग उठाई गई।
संघ ने अर्जित अवकाश के नगदीकरण, सरकारी आवास, कर्मचारी संघ के कार्यालय के लिए स्थान, संघ पदाधिकारियों के साथ नियमित बैठक तथा उच्च न्यायालय की भर्तियों में अधीनस्थ न्यायालय कर्मचारियों के लिए 25 प्रतिशत सीट आरक्षित करने और आयु सीमा में छूट की मांग भी रखी।
आमसभा में आंदोलन की रणनीति भी तय की गई। 13 सितंबर को सदर विधायक को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा जाएगा। दो अक्टूबर को शांतिपूर्ण तिरंगा यात्रा निकाली जाएगी। मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं होने पर 25 अक्टूबर को प्रदेशभर के जनपद न्यायालय कर्मचारी लखनऊ पहुंचकर सत्याग्रह में शामिल होंगे। इस दौरान कर्मचारियों ने मांगों को लेकर एकजुटता और लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।


