– डिफेंस कॉरिडोर में कानपुर की मजबूत दावेदारी
– स्थानीय उद्योगों को रक्षा उत्पादन से जोड़ने और बड़े निवेश की तैयारी
कानपुर। कानपुर को देश के प्रमुख रक्षा विनिर्माण केंद्रों में शामिल कराने की दिशा में सांसद रमेश अवस्थी की पहल और लगातार प्रयासों ने शहर के औद्योगिक विकास को नई उम्मीद दी है। उनकी सक्रियता से कानपुर की औद्योगिक क्षमता को उत्तर प्रदेश डिफेंस इंडस्ट्रियल कॉरिडोर से जोड़ने, स्थानीय उद्योगों को रक्षा उत्पादन की राष्ट्रीय आपूर्ति श्रृंखला में भागीदार बनाने और बड़े निवेश को आकर्षित करने की दिशा में ठोस कवायद शुरू हुई है।
सांसद रमेश अवस्थी का जोर कानपुर की पारंपरिक औद्योगिक पहचान को आधुनिक रक्षा एवं एयरोस्पेस विनिर्माण से जोड़ने पर है। उनका प्रयास है कि शहर में मौजूद सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) को रक्षा क्षेत्र की बड़ी कंपनियों से जोड़ा जाए, ताकि स्थानीय उद्यमियों को नए कारोबारी अवसर मिलें और कानपुर में उत्पादन के साथ रोजगार के नए रास्ते खुलें।
कानपुर पहले से ही इंजीनियरिंग, मशीनरी और विभिन्न औद्योगिक गतिविधियों का बड़ा केंद्र रहा है। सांसद रमेश अवस्थी इसी औद्योगिक क्षमता को रक्षा उत्पादन की जरूरतों के अनुरूप विकसित कराने की दिशा में प्रयास कर रहे हैं। उनका मानना है कि स्थानीय उद्योगों की तकनीकी क्षमता का उपयोग रक्षा क्षेत्र में बढ़ाया जाए तो कानपुर डिफेंस कॉरिडोर में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
इसी उद्देश्य से रक्षा क्षेत्र, तकनीक, उद्योग और नीति निर्माण से जुड़े विशेषज्ञों के बीच व्यापक विचार-विमर्श की पहल की गई है। ‘स्ट्रेटेजिक उत्तर प्रदेश, कानपुर रीजनल डिफेंस वर्कशॉप’ के माध्यम से कानपुर के औद्योगिक इकोसिस्टम, निवेश की संभावनाओं और रक्षा निर्माण से जुड़े अवसरों पर चर्चा अहम रहीं ।
सांसद की पहल का सबसे महत्वपूर्ण पक्ष स्थानीय एमएसएमई को रक्षा क्षेत्र से जोड़ना है। अभी तक अनेक छोटे और मध्यम उद्योग पारंपरिक उत्पादों तक सीमित हैं। उन्हें रक्षा क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्पादन, तकनीक और गुणवत्ता मानकों से जोड़कर बड़े रक्षा प्रतिष्ठानों की आपूर्ति श्रृंखला का हिस्सा बनाया जा सकता है।
इससे स्थानीय उद्यमियों के कारोबार का विस्तार होने के साथ ही नई उत्पादन इकाइयों की स्थापना की संभावना बढ़ेगी। रक्षा उद्योग के साथ सहायक उद्योगों के विकसित होने से परिवहन, तकनीकी सेवाओं, कौशल प्रशिक्षण और अन्य क्षेत्रों में भी रोजगार के अवसर पैदा हो सकते हैं।
कानपुर में रक्षा उद्योग को बढ़ावा देने के लिए केवल निवेश आकर्षित करना ही पर्याप्त नहीं है। इसके लिए उद्योगों को आवश्यक सुविधाएं, तकनीकी सहयोग, कुशल मानव संसाधन और अनुकूल नीतिगत वातावरण उपलब्ध कराना भी जरूरी है। इसी को ध्यान में रखते हुए रक्षा निर्माण को मजबूत करने के लिए नीतिगत एवं संस्थागत सुधारों पर भी विशेषज्ञों के साथ विचार-विमर्श महत्वपूर्ण हैं ।
रक्षा और तकनीकी क्षेत्र के विशेषज्ञों, उद्योग प्रतिनिधियों तथा नीति से जुड़े लोगों की भागीदारी से कानपुर की मौजूदा क्षमताओं और संभावित कमियों का आकलन किया जाएगा। इससे भविष्य के लिए ऐसी रणनीति तैयार करने में मदद मिल सकती है, जिससे निवेशकों के लिए कानपुर अधिक आकर्षक बने।
इस महत्वपूर्ण कवायद में ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन और उत्तर प्रदेश सरकार की सहभागिता है। कार्यशाला में ओआरएफ के उपाध्यक्ष प्रोफेसर हर्ष वी. पंत, कानपुर नगर के जिलाधिकारी जितेंद्र प्रताप सिंह और सांसद रमेश अवस्थी सहित रक्षा, तकनीक और उद्योग क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ भाग लेंगे।
पहले सत्र में ‘उत्तर प्रदेश डिफेंस कॉरिडोर के अंतर्गत कानपुर का औद्योगिक इकोसिस्टम’ विषय पर चर्चा होगी। इसमें जिला उद्योग केंद्र के उपायुक्त अंजनीश प्रताप सिंह सहित डीएमएसआरडीई, एयरोस्पेस एवं एविएशन, रक्षा उद्योग और अन्य संस्थानों से जुड़े विशेषज्ञ शामिल होंगे।
दूसरे सत्र में ‘रक्षा निर्माण को मजबूत करने के लिए नीतिगत एवं संस्थागत सुधार’ पर चर्चा होगी। इसमें रक्षा मंत्रालय के पूर्व वित्तीय सलाहकार, रक्षा उद्योगों के प्रतिनिधि, तकनीकी विशेषज्ञ और नीति क्षेत्र से जुड़े विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे।
कार्यशाला के बाद विशेषज्ञ एमकेयू लिमिटेड के औद्योगिक परिसर का भी दौरा करेंगे। इससे कानपुर में रक्षा उत्पादन से जुड़े मौजूदा औद्योगिक ढांचे, तकनीकी क्षमता और उत्पादन व्यवस्था को करीब से समझने का अवसर मिलेगा। इसके आधार पर कानपुर में रक्षा विनिर्माण की संभावनाओं को और मजबूत करने के सुझाव सामने आने की उम्मीद है।
सांसद रमेश अवस्थी की कोशिशों का व्यापक उद्देश्य कानपुर को ऐसा रक्षा औद्योगिक केंद्र बनाना है, जहां बड़े रक्षा प्रतिष्ठानों के साथ-साथ स्थानीय छोटे और मध्यम उद्योग भी विकास के भागीदार बनें। उनका प्रयास है कि निवेश आए, स्थानीय उद्योगों को काम मिले, युवाओं को रोजगार मिले और कानपुर की औद्योगिक पहचान राष्ट्रीय रक्षा उत्पादन से जुड़े।


