सही सोच इंसान को ऊंचाई तक ले जाती है
न्यूयॉर्क। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत ने शनिवार रात न्यूयॉर्क के मैडिसन स्क्वायर गार्डन में भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिकों को संबोधित किया। करीब 42 मिनट के संबोधन में उन्होंने कहा कि एकता और विविधता भारत के डीएनए में है। लोग अलग-अलग दिखाई देते हैं और उनकी जीवनशैली व जरूरतें भी अलग हो सकती हैं, लेकिन सभी के बीच स्वाभाविक जुड़ाव मौजूद है।
‘यूनिवर्सल वननेस सेलिब्रेशन’ कार्यक्रम में 5,000 से अधिक भारतीय मूल के अमेरिकी शामिल हुए। कार्यक्रम का आयोजन अमेरिकन हिंदूज फॉर एंगेजमेंट एंड डायलॉग ने किया था। इसमें 30 देशों के करीब 180 धार्मिक नेता भी पहुंचे।
भागवत ने कहा कि इंसान को सोचने की क्षमता मिली है, जो उसके लिए वरदान है। सही सोच उसे ऊंचाई और ईश्वर के करीब ले जाती है, जबकि गलत सोच उसे पशु प्रवृत्तियों के करीब ले जाती है। उन्होंने कहा कि भौतिक सुख और सुविधाएं जीवन के लिए जरूरी हो सकती हैं, लेकिन उनसे स्थायी संतुष्टि नहीं मिलती। कमाई के साथ सेवा और आध्यात्मिक विकास भी जरूरी है।
उन्होंने अमेरिका में रहने वाले भारतीयों से कहा कि अमेरिका उनकी कर्मभूमि है और उसके प्रति ईमानदार व वफादार रहना उनकी पहली जिम्मेदारी है। भारत जन्मभूमि है और वहां से मिले मूल्यों को जीवन में अपनाना ही सबसे बड़ा योगदान है।
भागवत ने धर्म को केवल पूजा या मजहब तक सीमित मानने से इनकार करते हुए इसे जीवन और समाज में संतुलन बनाए रखने वाला सिद्धांत बताया। उन्होंने कहा कि व्यक्ति, समाज और पर्यावरण तीनों को साथ लेकर ही वास्तविक विकास संभव है। किसी एक की प्रगति के लिए दूसरे को दबाना उचित नहीं है।
उन्होंने जीवन के चार चरणों—ब्रह्मचर्य, गृहस्थ, वानप्रस्थ और संन्यास—का उल्लेख करते हुए कहा कि हर पड़ाव की अपनी जिम्मेदारी है। पहले सीखना, फिर परिवार और समाज की जिम्मेदारियां निभाना और बाद में अपने अनुभव अगली पीढ़ी को देना जीवन की स्वाभाविक प्रक्रिया है।
इससे पहले न्यूयॉर्क में ‘वन वर्ल्ड वन ह्यूमैनिटी’ कार्यक्रम में भागवत ने कहा था कि जो व्यक्ति यह सोचता है कि भारत में मुस्लिम नहीं होने चाहिए, वह हिंदू नहीं हो सकता। उन्होंने सभी रास्तों को एक लक्ष्य की ओर ले जाने और हर व्यक्ति की समान गरिमा की बात कही। कार्यक्रम के दौरान भारतीय प्रवासियों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दीं और भागवत को राखी भी बांधी।


