दो नई झीलों में बढ़ता पानी, 626 मौतें, 2,426 लापता
नेपाल ने भारत की मदद के लिए आभार जताया
320 भारतीयों से संपर्क नहीं, 80 पुल और 40 किमी सड़कें तबाह,
काठमांडू। नेपाल में हिमालयी क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन के बाद तबाही का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। नेपाल-चीन सीमा के पास भूस्खलन से बनी दो नई झीलों ने आपदा के बीच एक और बड़े खतरे की घंटी बजा दी है। एक झील से लगातार पानी रिस रहा है, जबकि दूसरी में पानी का स्तर बढ़ता जा रहा है। वैज्ञानिकों को आशंका है कि यदि दूसरी झील का प्राकृतिक बांध टूटा तो निचले इलाकों में फिर अचानक विनाशकारी बाढ़ आ सकती है।
बुधवार को हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर के ढहने और उसके बाद आए मलबे व पानी के तेज बहाव ने नेपाल के कई जिलों को अपनी चपेट में ले लिया था। देखते ही देखते नदियों का बहाव विकराल हो गया और पानी के साथ भारी मात्रा में कीचड़, रेत, बजरी और चट्टानें नीचे के इलाकों में जा पहुंचीं। मकान, सड़कें, पुल, बाजार और बिजली परियोजनाएं तबाह हो गईं। कई इलाके अब भी देश के दूसरे हिस्सों से कटे हुए हैं।
626 मौतें, 2,426 लोग अब भी लापता
नेपाल की आपदा एजेंसी के ताजा आंकड़ों के अनुसार देश में बाढ़ और भूस्खलन से 626 लोगों की मौत हो चुकी है और 2,426 लोग लापता हैं। चीन के तिब्बत क्षेत्र में अलग से सात मौतें और 554 लोगों के लापता होने की सूचना है। हालांकि अलग-अलग एजेंसियों के आंकड़ों में अंतर है और बचाव अभियान जारी रहने के कारण संख्या लगातार बदल रही है।
सबसे बड़ी चिंता लापता लोगों के परिजनों को लेकर है। काठमांडू समेत कई स्थानों पर लोग अस्पतालों और राहत केंद्रों के बाहर अपनों की तलाश कर रहे हैं। मलबे में दबे लोगों और बाढ़ में बह गए लोगों की तलाश जारी है, लेकिन खराब मौसम, टूटी सड़कों और दुर्गम पहाड़ी इलाकों के कारण राहत दलों को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
320 भारतीयों से संपर्क नहीं, 400 तिब्बत में सुरक्षित
भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक नेपाल में करीब 320 भारतीय नागरिक अब भी लापता या संपर्क से बाहर हैं। वहीं चीन की ओर नेपाल-तिब्बत सीमा पर फंसे करीब 400 भारतीयों के सुरक्षित होने की सूचना है। अब तक 84 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जिनमें त्रिशूली-1 जलविद्युत परियोजना में काम करने वाले 63 कर्मचारी और तमिलनाडु के 21 लोग शामिल हैं।
कैलाश मानसरोवर यात्रा से लौट रहे कई भारतीय भी आपदा में फंस गए थे। चीन की ओर फंसे भारतीयों के समूहों को नेपाल के रास्ते सुरक्षित निकालकर काठमांडू पहुंचाया जा रहा है।
80 पुल और 40 किलोमीटर सड़कें तबाह
बाढ़ ने नेपाल के परिवहन नेटवर्क को भी भारी नुकसान पहुंचाया है। करीब 80 पुल और 40 किलोमीटर सड़कें क्षतिग्रस्त होने की जानकारी सामने आई है। रसुवा, नुवाकोट और आसपास के कई पहाड़ी इलाकों में सड़क संपर्क टूट गया है। कई गांवों तक अब केवल पैदल या हेलिकॉप्टर से पहुंचा जा सकता है। चीन से व्यापार के लिए महत्वपूर्ण सीमा मार्ग और ग्यिरोंग पोर्ट क्षेत्र भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है।
नेपाल ने संपर्क व्यवस्था बहाल करने के लिए भारत और चीन से 42 बेली ब्रिज बनाने में मदद मांगी है। टूटे पुलों की जगह अस्थायी पुल बनने के बाद ही कई प्रभावित क्षेत्रों में राहत सामग्री और बचाव दलों की आवाजाही आसान हो सकेगी।
दूसरी झील टूटी तो फिर आएगी आफत
नेपाल-चीन सीमा के पास बनी दोनों झीलों पर अधिकारी लगातार नजर रख रहे हैं। पहली झील से पानी रिस रहा है, जबकि दूसरी झील का आकार बढ़ रहा है। वैज्ञानिकों का कहना है कि दूसरी झील का बांध कमजोर हुआ तो बड़ी मात्रा में पानी अचानक नीचे की ओर आ सकता है। इतना ही नहीं, दूसरी झील टूटने पर उसका पानी पहली झील में पहुंचकर दोनों जलराशियों के एक साथ नीचे आने का खतरा भी है।
इसी आशंका के चलते राहत और बचाव दलों को निचले इलाकों में अतिरिक्त सतर्कता बरतने को कहा गया है। सैटेलाइट तस्वीरों से झीलों की निगरानी की जा रही है और पानी के स्तर में तत्काल बदलाव पकड़ने के लिए कैमरे तथा सेंसर लगाने की तैयारी है।
भारत ने भेजी राहत सामग्री और विशेषज्ञ टीम
भारत ने नेपाल की मदद के लिए राहत अभियान तेज कर दिया है। अब तक 57.5 टन आपातकालीन राहत सामग्री भेजी जा चुकी है। भारतीय दल में डॉक्टर, पैरामेडिकल कर्मचारी और सुरंग बचाव विशेषज्ञ भी शामिल हैं। भारत ने जरूरत पड़ने पर बेली ब्रिज समेत अन्य जरूरी तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने की पेशकश की है।
नेपाल में हजारों परिवारों को भोजन, सुरक्षित पेयजल और जरूरी सामान की आवश्यकता है। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां भी राहत कार्य में सहयोग कर रही हैं। नेपाल सरकार अब सामान्य सहायता के साथ-साथ विशेषज्ञ तकनीकी मदद पर जोर दे रही है—जिसमें मलबे में फंसे लोगों को निकालना, शवों की पहचान, डीएनए जांच, संचार और सड़क-पुलों को फिर से चालू करना शामिल है।
हजारों परिवारों के सामने दोहरी मुसीबत
एक तरफ बाढ़ ने घर, रोजगार और संपर्क व्यवस्था छीन ली है, वहीं दूसरी तरफ नई झीलों के बढ़ते पानी ने प्रभावित इलाकों में रहने वालों की चिंता और बढ़ा दी है। बचावकर्मी मलबे में जिंदगी की तलाश कर रहे हैं और परिजन अपनों की खबर का इंतजार कर रहे हैं।
नेपाल इस समय एक साथ दो मोर्चों पर लड़ रहा है—एक तरफ पहले से हुई जलप्रलय की तबाही से लोगों को निकालना और दूसरी तरफ पहाड़ों में बन रही नई झीलों से संभावित दूसरी आपदा को रोकना। स्थिति बेहद संवेदनशील बनी हुई है और आने वाले घंटों में झीलों के जलस्तर तथा मौसम की स्थिति पर सबकी नजर है।


