– अधिकारियों ने पड़ताल करने की भी जहमत नहीं उठाई
– नियमों को ताक पर रखने पर इलाहाबाद हाईकोर्ट सख्त
– शिवकुटी थाने की गैंगस्टरी एफआईआर पूरी तरह रद्द
प्रयागराज। अपराधियों पर शिकंजा कसने के लिए बनाए गए गैंगस्टरी कानून के इस्तेमाल में पुलिस की गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शिवकुटी थाने में दर्ज गैंगस्टरी एक्ट की एफआईआर को रद्द करते हुए पुलिस और संबंधित अधिकारियों की कार्यप्रणाली पर कड़ी टिप्पणी की है। अदालत के सामने यह तथ्य आया कि जिन आरोपियों के खिलाफ गैंगचार्ट तैयार किया गया, उन्हें उसमें जेल में निरुद्ध बताया गया था, जबकि वे काफी पहले ही जमानत पर बाहर आ चुके थे।
अदालत ने इस तथ्य को महज कागजी गलती मानकर नजरअंदाज नहीं किया। हाईकोर्ट ने साफ तौर पर कहा कि संबंधित अधिकारियों ने तथ्यों की पड़ताल करने की जहमत नहीं उठाई और नियमों को ताक पर रखकर कार्रवाई की। अदालत की टिप्पणी ने गैंगस्टरी की कार्रवाई से पहले होने वाली पुलिस जांच और अधिकारियों की जिम्मेदारी पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
मामले का सबसे अहम पहलू पुलिस द्वारा तैयार किया गया गैंगचार्ट है। गैंगचार्ट में आरोपियों की स्थिति ऐसी दर्शाई गई, मानो वे जेल में बंद हों। दूसरी ओर, अदालत के समक्ष यह तथ्य सामने आया कि आरोपी बहुत पहले ही जमानत पर रिहा हो चुके थे और जेल के बाहर थे।
यानी पुलिस रिकॉर्ड में आरोपियों की स्थिति और वास्तविक स्थिति के बीच साफ अंतर था। हाईकोर्ट ने इसी बिंदु को गंभीरता से लिया और सवाल उठाया कि गैंगस्टर एक्ट जैसी कठोर कार्रवाई करने से पहले क्या संबंधित अधिकारियों ने आरोपियों की वास्तविक स्थिति की जांच तक की थी?
गैंगस्टरी एक्ट के तहत कार्रवाई केवल सामान्य पुलिस कार्रवाई नहीं होती। इसमें गैंगचार्ट की तैयारी से लेकर उसके अनुमोदन तक अधिकारियों की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। ऐसे में अदालत की टिप्पणी सीधे तौर पर उन अधिकारियों की जिम्मेदारी पर सवाल खड़ा करती है, जिन्होंने दस्तावेजों और तथ्यों का सत्यापन किए बिना कार्रवाई को आगे बढ़ाया।
हाईकोर्ट ने कहा कि अधिकारियों ने पड़ताल करने की जहमत नहीं उठाई। अदालत के इस रुख से साफ है कि गैंगस्टरी जैसे गंभीर कानून में महज कागजी कार्रवाई पर्याप्त नहीं है, बल्कि प्रत्येक तथ्य का सत्यापन जरूरी है।
गैंगस्टरी एक्ट का उद्देश्य संगठित अपराध और अपराधियों के गिरोह पर प्रभावी कार्रवाई करना है। लेकिन अदालत के सामने यदि गैंगचार्ट में ही आरोपियों की स्थिति गलत दर्ज पाए जाने लगे तो पुलिस की कार्रवाई की विश्वसनीयता पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
हाईकोर्ट ने इसी गंभीरता को देखते हुए मामले में हस्तक्षेप किया। अदालत ने माना कि जिस आधार पर गैंगस्टरी की कार्रवाई की गई, उसकी प्रक्रिया में गंभीर खामी थी। परिणामस्वरूप शिवकुटी थाने में दर्ज गैंगस्टरी एक्ट की एफआईआर को ही रद्द कर दिया गया।


