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Monday, August 24, 2026

गंगा-यमुना का जलस्तर घटा, प्रयागराज में बाढ़ का खतरा फिलहाल टला

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प्रयागराज। संगम नगरी में पिछले दिनों बढ़े गंगा और यमुना के जलस्तर के बीच सोमवार को राहत की खबर सामने आई। दोनों नदियों के जलस्तर में लगातार गिरावट दर्ज की गई है। इससे नदी किनारे और निचले इलाकों में रहने वाले लोगों ने राहत की सांस ली है। प्रशासन के अनुसार फिलहाल जिले के प्रमुख स्थानों पर जलस्तर खतरे के निशान से नीचे है और सभी तटबंध सुरक्षित हैं।
सुबह आठ बजे जारी जलस्तर रिपोर्ट के अनुसार नैनी में यमुना का जलस्तर 80.16 मीटर दर्ज किया गया, जो पिछले 24 घंटे में 47 सेंटीमीटर कम हुआ है। इसी तरह फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 81.11 मीटर रहा, जिसमें 16 सेंटीमीटर की गिरावट दर्ज की गई। छतनाग में गंगा का जलस्तर 79.67 मीटर दर्ज हुआ, जो पिछले 24 घंटे में 63 सेंटीमीटर नीचे आया है। बक्शी बांध स्थित एसटीपी पर भी जलस्तर 49 सेंटीमीटर घटकर 80.28 मीटर दर्ज किया गया।
खास बात यह है कि प्रयागराज के विभिन्न हिस्सों में बारिश होने के बावजूद नदियों का जलस्तर नीचे जा रहा है। रिपोर्ट के अनुसार नैनी में 6.4 मिलीमीटर, फाफामऊ में 2.2 मिलीमीटर और छतनाग में 6.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। इसके बाद भी जलस्तर में गिरावट जारी रहने से प्रशासन ने राहत महसूस की है।
प्रयागराज में बाढ़ का निर्धारित खतरे का निशान 84.734 मीटर है। वर्तमान में नैनी, फाफामऊ और छतनाग में दर्ज जलस्तर इससे काफी नीचे है। इससे फिलहाल तटीय मोहल्लों में बाढ़ का तत्काल खतरा नहीं है। हालांकि प्रशासन ने स्थिति को पूरी तरह सामान्य मानने के बजाय निगरानी जारी रखी है।
पिछले दिनों जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी के कारण नदी किनारे के इलाकों में चिंता बढ़ गई थी। 22 अगस्त को नैनी में यमुना का जलस्तर 80.69 मीटर और फाफामऊ में गंगा का जलस्तर 81.11 मीटर तक पहुंच गया था। इसके बाद प्रशासन ने तटीय और निचले इलाकों में निगरानी बढ़ा दी थी।
अब पानी घटने के बावजूद प्रशासन ने सतर्कता कम नहीं की है। तटबंधों की लगातार निगरानी की जा रही है। जल पुलिस, गोताखोर, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें तैयार रखी गई हैं, ताकि जलस्तर में अचानक बदलाव या किसी आपात स्थिति की स्थिति में तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया जा सके।
प्रशासन की नजर नदी के जलस्तर के साथ-साथ तटीय और निचले इलाकों की स्थिति पर बनी हुई है। लोगों से भी नदी के किनारे अनावश्यक रूप से जाने और तेज बहाव वाले स्थानों पर जोखिम लेने से बचने की अपील की जा रही है।
फिलहाल गंगा और यमुना के लगातार घटते जलस्तर ने संगम नगरी को बड़ी राहत दी है। तटीय क्षेत्रों में मंडरा रहा बाढ़ का खतरा फिलहाल टलता नजर आ रहा है, लेकिन प्रशासन अभी भी पूरी तरह अलर्ट मोड में है।

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