नई दिल्ली: भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को लेकर कूटनीतिक स्तर पर एक बार फिर अहम बातचीत होने जा रही है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल सोमवार को चीन के बीजिंग पहुंचेंगे, जहां वह भारत-चीन सीमा मुद्दे पर विशेष प्रतिनिधि (Special Representatives) वार्ता में हिस्सा लेंगे। बैठक में चीन के विदेश मंत्री और विशेष प्रतिनिधि वांग यी के साथ सीमा विवाद समेत द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
डोभाल का यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब भारत और चीन के बीच वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर तनाव कम करने की प्रक्रिया जारी है। जून 2020 में गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के रिश्तों में गंभीर तनाव पैदा हुआ था। इसके बाद पूर्वी लद्दाख में दोनों पक्षों ने बड़ी संख्या में सैनिक और सैन्य संसाधन तैनात किए थे।
विशेष प्रतिनिधियों की बैठक में LAC की स्थिति, सैनिकों की तैनाती, डिसएंगेजमेंट, सीमा प्रबंधन और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता जैसे मुद्दे प्रमुख रह सकते हैं। पिछले कुछ वर्षों में सैन्य और राजनयिक स्तर पर कई दौर की बातचीत हो चुकी है।
भारत-चीन विशेष प्रतिनिधि तंत्र केवल तत्काल सैन्य तनाव को संभालने तक सीमित नहीं है। इसका उद्देश्य सीमा विवाद के दीर्घकालिक राजनीतिक समाधान की संभावनाएं तलाशना भी है। ऐसे में डोभाल और वांग यी की बातचीत को दोनों देशों के रिश्तों को आगे बढ़ाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि सीमा पर शांति और स्थिरता दोनों देशों के संबंधों को सामान्य बनाने की बुनियादी शर्त है। ऐसे में डोभाल का चीन दौरा सीमा विवाद के साथ-साथ भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों में सुधार के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


