– खुलेआम धमकियों और पंजाब पुलिस पर प्रभाव के दावों से सनसनी
– बड़े कारोबारी सिंडिकेट की गतिविधियों पर उठे गंभीर सवाल
– सुल्तानपुर से जुड़े सिंडीकेट के तार
लखनऊ। दिल्ली से संचालित एक कथित कारोबारी सिंडिकेट के बेंगलुरु, असम, केरल, चंडीगढ़ और पंजाब तक अपना नेटवर्क फैलाने की चर्चाओं ने शासन-प्रशासन के कान खड़े कर दिए हैं। आरोप है कि इस नेटवर्क से जुड़े लोगों ने विभिन्न स्तरों पर प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए बड़े कारोबारी खेल की तैयारी शुरू कर दी है।
सबसे गंभीर आरोप जीएसटी विभाग के कुछ लोगों से कथित मिलीभगत को लेकर लगाए जा रहे हैं। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं तो मामला केवल कर चोरी या कारोबारी अनियमितताओं तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी तंत्र के दुरुपयोग और राजस्व को नुकसान पहुंचाने के गंभीर सवाल भी खड़े होंगे।
सूत्रों के अनुसार, नेटवर्क से जुड़े कुछ लोगों द्वारा खुलेआम धमकियां दिए जाने और कार्रवाई से बच निकलने के दावे किए जा रहे हैं। यहां तक कहा जा रहा है कि पंजाब पुलिस पर भी उनका प्रभाव है और पुलिस को अपनी मुट्ठी में होने का दावा किया जाता है। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन जिस तरह अलग-अलग राज्यों में गतिविधियों की चर्चा सामने आ रही है, उससे सुरक्षा और प्रशासनिक एजेंसियों की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है।
दिल्ली से शुरू होकर कई राज्यों तक पहुंचा नेटवर्क
बताया जा रहा है कि कथित नेटवर्क ने दिल्ली को केंद्र बनाकर बेंगलुरु, असम, केरल, चंडीगढ़ और पंजाब तक कारोबारी गतिविधियों का विस्तार किया है। अलग-अलग राज्यों में संपर्क, कारोबारी प्रतिष्ठानों और प्रभावशाली लोगों के माध्यम से नेटवर्क मजबूत किए जाने की बात कही जा रही है।
मामले में अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि इतने बड़े स्तर पर कारोबार संचालित किया जा रहा है तो संबंधित कंपनियों, लेनदेन, जीएसटी पंजीकरण, कर भुगतान और वास्तविक कारोबार की जांच कितनी गहराई से हुई है।
पूरे मामले ने शासन-प्रशासन के सामने कई सवाल खड़े कर दिए हैं। जीएसटी विभाग, आर्थिक अपराध से जुड़ी एजेंसियों और संबंधित राज्यों की पुलिस को आरोपों की निष्पक्ष जांच करनी होगी। खासकर सरकारी अधिकारियों से कथित मिलीभगत, संदिग्ध वित्तीय लेनदेन और धमकी देने के आरोपों की स्वतंत्र जांच जरूरी मानी जा रही है।
हालांकि, सामने आए आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में जांच पूरी होने तक किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी ठहराना उचित नहीं होगा। लेकिन आरोपों का दायरा जिस तरह कई राज्यों तक पहुंचता बताया जा रहा है, उसने मामले को सामान्य कारोबारी विवाद से कहीं अधिक गंभीर बना दिया है।
अब निगाह इस बात पर है कि शासन इस कथित सिंडिकेट की तह तक पहुंचकर वास्तविकता सामने लाता है या नहीं।


