लखनऊ
चर्चित डबल मर्डर और खुदकुशी मामले की जांच में नया मोड़ सामने आया है। पुलिस की पड़ताल में सामने आया है कि पत्नी दिव्या मिश्रा और बहन तूलिका की हत्या के बाद खुदकुशी करने वाले बैंक अधिकारी मानस बाजपेयी को सीतापुर के एक अधिवक्ता ने असलहे उपलब्ध कराए थे। बैंक के काम के सिलसिले में मानस की अधिवक्ता से मुलाकात हुई थी और बाद में दोनों के बीच दोस्ती होने की बात सामने आई है। पुलिस अब अधिवक्ता से पूछताछ की तैयारी कर रही है और यह पता लगाने में जुटी है कि असलहे कब और किस माध्यम से मानस तक पहुंचे।
पुलिस के मुताबिक, मानस के कानूनी मामलों को भी यही अधिवक्ता देख रहा था। घटना के बाद से अधिवक्ता के भूमिगत होने की बात सामने आई है। पुलिस ने उसकी कॉल डिटेल निकलवाई है और मानस से उसकी आखिरी मुलाकात के समय का पता लगाया जा रहा है। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि अधिवक्ता ने खुद असलहे उपलब्ध कराए थे या किसी अन्य व्यक्ति के जरिए मानस तक पहुंचाए। अभी यह स्पष्ट नहीं है कि इन असलहों के लिए कितनी रकम दी गई थी। पुलिस के अनुसार मानस के पास शस्त्र लाइसेंस भी नहीं था।
जांच में मानस के लॉक आईफोन को भी अहम माना जा रहा है। पुलिस फोन को खोलने की कोशिश कर रही है और दोस्तों व रिश्तेदारों से पासवर्ड के संबंध में जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस का कहना है कि फोन की कॉल डिटेल और लोकेशन से कई सुराग मिले हैं। घटना से पहले मानस ने किन लोगों से संपर्क किया था, इसकी सूची तैयार की जा रही है। दूसरी ओर, उसके मामा अवधेश शुक्ला ने बताया कि मानस पहले बेहद डरपोक स्वभाव का था और उसके पास या परिवार के पास पहले कोई असलहा नहीं था। ऐसे में तीन असलहों की उपलब्धता पुलिस जांच का अहम हिस्सा बन गई है।
पुलिस के अनुसार, मानस और दिव्या के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा था और जनवरी से तलाक का मामला भी चल रहा था। घटना वाले दिन मानस ने पहले बैंक के बाहर दिव्या की हत्या की, इसके बाद घर पहुंचकर अपनी बहन तूलिका की हत्या कर खुदकुशी कर ली। पुलिस को घर से दो पिस्तौल और एक तमंचा मिला था। अब जांच का मुख्य फोकस इन असलहों के स्रोत, अधिवक्ता की भूमिका, मानस के फोन में मौजूद जानकारी और घटना से पहले उसके संपर्क में रहे लोगों पर है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि पूरी घटना की पृष्ठभूमि में कौन-कौन से कारण और परिस्थितियां जिम्मेदार थीं।


