– डीएम डॉ. अंकुर लाठर ने किया स्थलीय निरीक्षण
– भूमि अभिलेखों और भवन की स्थिति की मांगी विस्तृत रिपोर्ट
फर्रुखाबाद। जिले की जनता को बेहतर नेत्र चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने महत्वपूर्ण पहल की है। जिलाधिकारी ने शुक्रवार को मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय के साथ फतेहगढ़ स्थित सीतापुर आई हॉस्पिटल का स्थलीय निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि यह अस्पताल पिछले करीब 15 से 20 वर्षों से नियमित रूप से क्रियाशील नहीं है।
सीतापुर आई हॉस्पिटल के लंबे समय से बंद रहने को लेकर स्थानीय लोगों की ओर से भी जिलाधिकारी से कई बार शिकायतें की गई थीं। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी ने मौके पर अस्पताल की वर्तमान स्थिति का जायजा लिया और इसके पुनरुद्धार की दिशा में कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए।
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने जिला शासकीय अधिवक्ता (सिविल) श्री कृष्णकांत महाजन को मौके पर बुलाकर अस्पताल से संबंधित भूमि अभिलेखों का अवलोकन किया। उन्होंने निर्देश दिया कि भूमि से संबंधित अभिलेखों का विस्तृत परीक्षण कर तथ्यात्मक विवरण सहित आख्या उपलब्ध कराई जाए।
इसके साथ ही जिलाधिकारी ने लोक निर्माण विभाग के अधिशासी अभियंता श्री मुरलीधर को अस्पताल भवन का पूर्ण भौतिक एवं स्थलीय निरीक्षण करने तथा भवन की वर्तमान स्थिति, आवश्यक मरम्मत और पुनरुद्धार से संबंधित विस्तृत आख्या प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी डॉ. अंकुर लाठर ने मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. आनंद उपाध्याय को निर्देशित किया कि संबंधित विभागों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए आई रिलीफ सोसाइटी के अंतर्गत आवश्यक विभागीय कार्यवाही की जाए और सीतापुर आई हॉस्पिटल को पुनः क्रियाशील करने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जाएं।
ज्ञातव्य है कि जिलाधिकारी आई रिलीफ सोसाइटी की अध्यक्ष हैं, जबकि मुख्य चिकित्सा अधिकारी इसके उपाध्यक्ष हैं। ऐसे में अस्पताल को पुनः संचालित करने के लिए प्रशासनिक स्तर पर समन्वित प्रयास किए जा सकते हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार सीतापुर आई हॉस्पिटल के लिए भूमि वर्ष 1963 में जिला प्रशासन द्वारा अधिग्रहीत की गई थी। अस्पताल का निर्माण जनता के सहयोग और शासकीय अनुदान से हुआ था। कुछ वर्षों तक यहां नेत्र अस्पताल का संचालन भी हुआ, लेकिन पिछले 15-20 वर्षों से इसका उचित ढंग से संचालन नहीं हो सका।
यह भी जानकारी सामने आई कि अस्पताल को पूर्व में शासन की ओर से अनुवर्ती अनुदान मिलता रहा था, जो वर्ष 2022 से बंद है। लंबे समय तक समुचित संचालन और रखरखाव के अभाव में अस्पताल भवन वर्तमान में जर्जर एवं क्षतिग्रस्त स्थिति में पहुंच चुका है।


